Lord Shiva's Divine Power appearience in blue colour light realized with open physical eyes. Both are Complementary.
Wednesday, October 11, 2023
Shiva's Blue Divine Light Appearience
Sunday, February 5, 2023
सत्य सनातन धर्म और अध्यात्म्
* सत्य सनातन धर्म *
सत्य सनात्तन का अर्थ क्या है:-
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1. सत्य तो सत्य है, सत्य ही ईश्वर है , सत्य धर्म का मूल परम तत्व है। सबसे पहले सत्य ही प्रकट हुआ और Space में सबसे ऊपर अपने दिव्य अंक्षाश पर स्थिर हो गया। सभी प्रकार के तत्व भी सृष्टि की रचना के नियम अनुसार एक दम प्रकट होते हैं। सत्य निती भी यही है कि विधी का नियम बडा अटल है और स्वभाविक तौर पर सब तत्व पवित्र होने पर, गुणातीत होने पर, अपने मूल तत्व से मिलने के लिये परम तत्व की ओर परम सत्य की ओर खिंचे चले आते हैं। यही ईश्वरीय धर्म है।
2. भौतिकी से सन-sun सूर्य+आतन मैने आना अर्थात संसार औतिकी से अध्यात्त्मिकता की ओर चले आना, सत्य की ओर, अपने मूल तत्व की ओर अग्रसर होना। जो सत्य था, सत्य है और सत्य ही रहेगा।
सृष्टि की रचना के प्रारम्भ में जब इस पवित्र धरा पर किसी जीव प्राणी ने अपना कदम रखा, यहां कोई धर्म नहीं था। न कोई देश न कोई दुनिया थी फिर ये धर्म कहां से आ गये। सनातन को जानने के लिये अध्यात्त्म की गहराई मे जाना होगा। सृष्टि के आरम्भ में केवल मात्र एक सद्धभाव, सत्य सनातन भाव का एहसास था। करोडों सालों के बाद इस पवित्र धरा पर जीव उत्तपन्न हुआ और वक्त अनुसार जीव का Modification होते होते हजारों सालों के बाद कोई मानव देह किसी आदि जीव को प्राप्त हुई होगी। और इसके हजारों साल के बाद मानव सभ्यता का विकास हुआ होगा और जैसे जैसे मानव को सूझ होती गई, सत्य को अपनाया। इस समय तक ना कोई जातिवाद था न कोई धर्म था। पूरी पृथ्वि पर मानव सभ्यता थी और एक सत्यवादी सनातन धर्म का भाव रहा होगा। और इस पवित्र धरा का भारत देश नाम दिया होगा। उस काल में सब सात्विक थे, सनातनी थे, आर्य थे और मानवता का भाव था। जहां जिस धर्म में सत्य व सात्विकता भाव पाया जाता है वही सनातन धर्म है। जो आज भी हमारे प्रिय: देश, भारत देश में अनुभव में आ सकते हैं।
दुर्लभम् दुर्लभम् आत्म-भक्तौ
गोविंदम् आदि-पुरुषम् तम अहं भजामि
🙏 🙏 🙏
Sunday, January 29, 2023
* God is Sawyambhu *
* Means who get Manifested its own *
" And Creation of the shristi is
also get manifisted its own. "
God is Immortal. Who never comes in the Cycle of Birth and Death like Humans.
As we all know that there is a law-ordered divine creation of creation and all living beings are subordinated to the natural reproduction process, in this wonderful world, according to the orderly creation of beautiful creation, according to the mode of movement, normally from the sacred womb of the mother. They adopt the body they were born with. Be it Lord Krishna, be it Lord Sri Ram, be it Lord Sri Buddha, be it Lord Sri Yashu, all through a normal procreative process, from the sacred womb of the mother, according to the law of nature, the sacred divine womb of the physical body.
Wednesday, January 4, 2023
भगवान गर्भ से जन्म नहीं लेते, भगवान का ईश्वरिय शक्ति से दिव्य व अलौकिक अवतर्ण होता है
जय श्री कृष्णा जी
आदरणीय परम स्नेही भग्त जनों सादर प्रणाम्
" भगवान गर्भ से जन्म नहीं लेते , भगवान का आलौकिक व आदि दिव्य शक्ति द्वारा अपनी प्रकृति को अपने वश में करके योगमाया के अनुरूप अवतर्ण होता है " और साकार रूप में साक्षात प्रकट होते हैं।
श्रीमद्भगवद्गीता अ 4 - शलो 9
श्री कृष्णा कहते हैं:
Means who get Manifested its own. God is immortal. Who never comes in the Cycle of Birth and death like humans.
Does God take Birth ?
1. Vedas say that God does not take Birth
2. Bhagavadgita says God take birth
* Secular Spiritual Truth *
Ans :----
इस प्रकार लगता है करनाल का यह 200 km, किलो मीटर का ऐरिया, ईश्वरीय प्रेम से भरपूर, भगवान को अति प्रिय:, ओर पवित्र क्षेत्र है। जितने भी मानवता की भलाई के कार्य हुए, यहीं पर हुए। दूसरी ओर कुरुक्षेत्र में राजा क्रूर का राज्य होता था। देखा जाय सभी क्रूर घटनायें दोनों विश्व युद्ध ओर महाभारत युद्ध इसी क्षेत्र में हुए। देखा जाय, कुदर्त्तन, सभी महान दिव्य शक्तियां आज तक इसी क्षेत्र में अवतरित होती हुई नजर आई। दुर्गा स्वरूप देवी सीता माता भी अनुभव के आधार पर ऐसा लगता है इसी क्षेत्र में कहीं आसपास इस पवित्र धरा में समाई थी। श्री कृष्णा, सूर्य पूत्र राजा कर्ण, कुन्ति पुत्र धनुषधारी अर्जुन, सभी देवता स्वरूप द्रुपद्ध, देवी द्रौपदी, पांडव , ऋषिवर वेद व्यास जी, सभी देवियां, दैव्य शक्तियां ने यहीं इस पवित्र धरा पर ही अपने शुभ चरण यहां पर रखे
Sunday, December 25, 2022
Every Thing You Have Yet Nothing Is Your's
*Every Thing you have yet nothing is hour's*
It is believed that everything is here in this beautiful world but at one time nothing is visible here, Because, changing is the Law of Nature. We should set our mind in the search of Truth. True happiness and joy is found in the Refuge of God, while worldly happiness is short lived.
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* Is there a God *
- हवा को ले......बावरोला, से बवन्डर... किसी को नही पता हवा में कौन कौन शक्तियाँ छीपी पडी है यह तो जब अक्षमात् से प्रकट होती हैं अनुभव होता है तभी पता लगता है। सृष्टि में अनेक प्रकार के elements हैं लेकिन हमारी भौतिक आंखों से दिखाई नहीं देते। लेकिन प्रभू कृपा होने पर, या दिव्य नेत्रो से कभी कभार दर्शन हो भी जाते हैं।
- पृथ्वी को ले....एक से बडकर एक अनेक प्रकार के अनमोल द्रव्य- पद्धार्थ सोना, चांदी, सटील, खनिज तेल गैसज.,cyclone, ज्वालामुखी फटना पृथ्वी तक फट जाती हैं सब शक्तियां इस पवित्र धरा की ही तो देन ह ,
- तेज अग्नि...... एक से एक गैसज hydrogen oxigen nitrogen, camical elements यह सब जब अपनी power दिखाने पर आएं तो इस ब्रह्माण्ड में बहुत कुछ घटित हो जाता है
- पानी....आप देखिये एक समय मौसम बिल्कुल साफ होता है और अचानक हम देखते है गहरी काली घटाएं आसमान में छा जाती है जो लगातार मुसलाधार बारिष होने पर चारों ओर पानी ही पानी हो जाता है तुफान से समस्त वन सम्पदा हिल जसती है इतना ही नही. बादल का फटना, जलजला, सोनामी आदि
- आकास......Globing warming जो घटनाएं अब सुनने में आ रही हैं हमारे scientists जिन घटनाओं का जीकर करते आ रहे हैं Divine-O-zone, Planets Sun moon stars Aakas-gangaye और इनमे होने वाली घटनायें जो अचानक घटित होती आ रही है जैसे Nibiru, Asteroid, और सौरमंडल मे हलचल यह सब शक्तियां लुप्त है। यहां पर पांच प्रकृति के main तत्व हैं इन सबमें एक से एक रहस्यमय और शक्तियां छिपी हुई है जिनपर जबसे सृष्टि बनी तबसे लेकर आजतक जानने के लिये शोध हो रहा है, इन्हे अनुभव में लाने का प्रयास होता आ रहा है।
- आत्म तत्व....... ठीक उसी प्रकार से छटा तत्व है Atom Tattav आत्म तत्व और Supreme Tattav परम तत्व। Hinduism में भी अध्यात्त्म में भगवान जो एक Automatic, Systematic, Divine Supreme Power's creation है को जानने के लिये, इसे अनुभव लाने के लिये प्रयास होता आ रहा है और कभी न कभी प्रभू कृपा होने पर साक्षात्कार हो भी हो जाएगा और हो चुका है। ध्यान रहे एक बहुमूल्य हीरा कोयले की खान से निकलता है। ठीक इसी प्रकार प्रभू कृपा पाकर एक तात्विक पुरुष, अवतारी पुरुष भी आप लोगों के आशिर्वाद से ही आप सब के बीच मे अपने सूक्षम शरीर से प्रकट हो सकता है। यह धन दौलत यह माया ऐशो आराम यह प्रोपरटी, यह ऊंचे ऊंचे महल , सोना चांदी यह सम्पत्ती तो थोडे समय के लिये साथ देने वाली हो सकती हैं । जो एक अल्पकालीन शु:ख है। असली धन तो अनन्य भग्ति करते हुए, परम सत्य की खोज, आदि परा शक्ति का अनुभव, परम पिता परमात्मा की कृपा है, जो आपके साथ आजीवन आदि अंत और मध्य तीनो अवस्थाओं में साथ देने वाली है। सच्चा सुख तो भगवान की शरण में है। भगवान को समर्पित होना होना चाहिये। इस लिये हमें अपने प्रभू से नाता जोडना चाहिये प्रभू की अनन्य भग्ति कर मालिक से योग करना चाहिये, जहां से परम आनन्द की प्राप्ती होती है।
Sunday, December 4, 2022
अवतार को समझने का प्रयास करते हैं
सबसे पहले तो हमें यह जान लेना चाहिये और मान लेना चाहिये कि आत्म तत्व तो हर जीव प्राणी को जव से सृष्टि बनी तभी से लेकर आज तक सभी प्रकार की सृष्टियो को नित्य प्राप्त है । .....अब यह सृष्टि क्या है ? ...इसे समझना है.........
- वायु ------ वायु तत्व को ही लें क्या आपने प्रकृति के इस सनमोल वायु तत्व को देखा है ? सूक्ष्म रूप में वायु के अन्दर समस्त हमारे इस अद्धभुत् universe में जितनी भी प्राकृतिक सामग्री elements, Gases powers है उनके miner - atom's अणु विद्धमान हैं क्या किसी ने भौतिक आँखों से इन्हें देखा है ? वो अलग बात है microscope आदि उपकर्णों की सहायता से देख लेते हैं लेकिन कभी इस वायु में छिपी इसकी असली power को जाना है। No-- आप बावरोला भभूला जिसे कहते हैं जो एक विराट शक्ति, विनास कारी * भवंडर * का रूप धारण कर लेता है पहले कोई सोच भी नही सकता। जब आता है तभी अनुभव कर सकते हैं । जो एक भयंकर विनासकारी आपदा का कारण भी बन सकता है। लेकिन इसे अनुभव नहीं कर सकते और भगवान को अनुभव करने की सब बात करते है ? ........ ऐसी बात नही भगवान बडे दयानिदान हैं और सरल अनन्य भग्ति द्वारा ही अपने परम भग्त पर कृपा कर सु-दर्शन दे दिया करते हैं।
- जल.-------- जल में जो प्राकृतिक अद्धभुत् दिव्य शक्ति छुपी हुई है किसी ने देखी है क्या ? नहीं देखी अनुभब तो हो जाता है लरकिन activation होने के बाद ही आपके अनुभव में आता है जैसे कि आसमान में पानी से बने बादल बनते हैं फिर वह एक दूसरे सर टकराते हैं उनके टकराने से आकाशीय बिजली बन कर बरसात के साथ नी चे गिरती है की बार जंगलो में आग लग जाती है प्राणी मर जाते है विनास हो जाता है समूद्र का लज स्तर बढजाता है सोनामी का कारण बन जाता बहुत विनासकारी तूफान आ जाता है बडी आपदा का कारण बन जाता है
- पृथ्वी:-------- हमारा प्रिय: भारत देश एक दिव्य देश है देव प्रिय: पवित्र धरा है ऋषि, मुनि संत पीर पैगाम्भर अवतार महात्मन देवी देवता इस पवित्र धरा पर जन्म पाने के लिये तरस्ते हैं हम सबकी धरती मां हैं इस धरती मां के सीने में क्या कुछ छिपा है पूरी तरह से आजतक कोई नहीं जान पाया है फिर भी अद्भुतग दिव्य शक्तियो का राज इस पवित्र धरा में गुप्त रूप मे लुप्त है एक से एक अनमोल धन, सम्पधा, रतन, अमूल्य मेटल, gravity power चुम्बकिय शक्ति इसमें अदृष्य है। आप जिसे देख नहीं पाय अनुभव जरूर किया होगा । ज्वाला मुखी, भूकम्प जैसी महाशक्ति, गैस , खनिज, तेल आदि सब शक्तियां इसमें हैं लेकिन दिखाई नहीं देती बस भगवान को देखना चाहते । वह तो परम पिता परमात्मा की माया जो उसी की कृपा से ही अनुभव हो सकती है बाकी भगवान तत्व रूप में सबको नित्य प्राप्त तो है फिर भी उन्हें अनुभव में लाने का प्रयास तो हम सबको करना पडेगा, क्योकि It is the mater of self realization.
- अग्नि:..........अग्नि, हमारे सूर्य देवता अग्नि का प्रतिक है हिन्दूइजम के अनुसार सूर्य भगवान हमारे जीवन का इस समस्त प्रकृति का इस समस्त सृष्टि का आधार हैं समस्त संसार के थलचर, नभचर, जलचर जीव प्राणी इस अग्नि तत्व जो हम सबके हृदया में तेज के रूप में धधक रहा सभी की इसी अनुभव है सूर्य से पृथ्वी पर पडने वाली किरणे महसूस की जा सकती पर दिखाई नही देती । जब से यह सुन्दर सृष्टि बनी इस समस्त सृष्टि चक्र का आधार ही इसी दिव्य सूर्य शक्ति पर निर्भर करता है ।जब तक सूर्य चादं रहेगा मानव तेरा धाम रहेगा , हम और आप सब तभी तक सलामत है अग्नि तत्व की यह किरणे दिखाई नही देती । माचिस की तिली में अग्नि है पर दिखाई नहीं देती रगडनें पर ही अग्नि प्रकट होती है ठीक इसी प्रकार भगवान तो है पर अनन्य भग्ति करने पर और भगवान की कृपा होने पर ही भगवान उनके परम भग्त के अनुभव में आसकते हैं.
Sunday, November 20, 2022
Why it is said that Lord Krishna is an Avatari but not an Avatar?
Quora --
Question:- Why it is said that Lord Krishna is an Avtari but not an Avatar ?
Answer by Rohtas:---
* Om Namo Narayana *
Because Lord Shri Krishna himself was the incarnation of Adhi Ishwar Lord God, Narayan in Dawapar-Yuge
Respected true devotee of God,
Hearty Namaskar
" God is God no one else can be God "
God is a divine entity who, from the time of creation till today, is like subtlest divine molecule, Atom, shinning just like a Diamond particle and Existing permanently fixed beyond its divine latitude.
In the beginning of the creation of the Shristi God Himself creates an Adhi God, Who is known by the name of Formated God, having completely all the divine Qualities of Adhi God just like Himself.
This Adhi Ishwer, The Formated God later on become incarnated and creates the creation of Trimurti God including His Triguni Maya, Who creates this beautiful Shristi and remains present in the Beginning, End and in the middle of all the three Stages till Mahaperlaya.
Lord Shree Krishna was the incarnation of this Adhi Ishwar " The Formated God " Lord NARAYANA. In Dawapar-Yuge as per His Statement He appears again and again between us in this beautiful Shristi and Who is present among all of us in this beautiful Shristi in His Wonderful Divine Mohini Form ..... " MANUSHOM-ROOP " and have appeared.
Lord Shri Krishna was the incarnation of the Adhi Lord God, Lord NARAYANA in Dwapara-yuga
Lord Shree Krishna had the divine Lord NARAYANA's body whereas Lord Narayana Himself was the incarnation of the Supreme Divine Soul. Thus Lord Krishna was an Avatar and was also an Incarnation "Avtari" and was full of Divinity in every way in every Era
Das Anudas Rohtas
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