Thursday, December 16, 2021

You are Welcomed in Spirituality

         You are Welcomed in Spirituality

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🌷 Om Namo Narayana🌷


A Divine Soul body Worshipping to Aadhi God in Divine Roohani Loka
True Devotion


It may be Very great secrecy during meditation
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            ध्यान साफ 3-15am on 25-1-22 बहुत गहरा ध्यान Space में बहुत दूर अजीब जगह कोई ऐसा लगा, मानो किसी दिव्य लोक पर underground जगह है वहां जो इमेज में दर्शाया गया एक theator  जैसा नजर आ रहा है यह सब दिव्य है in internal divine universe और मानो चार पांच रूहें अपने शूक्षम शरीर में बैठी कोई विशेष Secret काम कर रही हैं और हम भी अपने दिव्य सूक्षम शरीर से गये।  और चुपचाप उन्हें अवलोकन कर वापिस आ गये।
हमने पहले सिलवर रंग का made for special Space mission Helmet  उतारा और फिर scielentely ,अन्दर हाल में चुपके चुपके नीचे दर्शाये गये theator मे चले गये और अच्छी तरह निहार कर दबे पैरों वापिस चले आय। there was very peacefulness.


Shree Radha Krishna Raas Leela 









Que:---  Space Mission. In Grup's comment:-       28-12-2021

  " Is therec more than One Universe "

Answer by Rohtas:--

Respected Sir,

             Spiritually, It depends on the individual's ability to experience the divine, how deeply he, being introspective, can observe his inner divine universe through deep meditation through the celestial eyes of the mind. We realized multi planets, stars and Galaxies, Milky-ways (Akas-Gangas) during meditation not multi universe.
  


            Das Anudas Rohtas




Wednesday, December 15, 2021

Movement in Sun

                 🙏 Movement in Sun 🙏

We realized movement in the Sun very shortly and very strangely in meditation, during worship, at 9-15 am, on 15-12-2021 to going below in video

" No controle of Nature in human's hand beside's God "



Divine realization during meditation Black Hole in hole in hole in hole



Tuesday, November 30, 2021

Oh My God 👏

                  ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ 

                   Om Tat Sat          

      Oh My God, Please Excuse Us 

                     🙏🙏🙏🙏🙏

According to the experience during meditation, it seems as if the Sun God is becoming Cristol due to the weakening of the Gravity Power and is seen scattering down in the space
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It may be cause Global warming
Colourful Vortical Gravity Radiation Waves also realized in Space in meditation during Worshipping Sun, " It was realized as if someone had spread a Divine celestial Net (Inder-Jaal) and made of  Nuchlair rediation in  Universe." First time 3-30 am in 16-9-17 which showed by Video & now secondly at 9-15 am, on 14-12-2021 

Colourful Vortical Gravity Waves

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Circulation Clock-wise

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Based on extensive studies of biblical texts, he estimated that the world would “reset” in 2060, when “the Kingdom of God” would prevail ...
I believe, scientificly, dainly and religiously end of the world, will happen in near.... Newton

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Moon

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  ***( Nuclare War could Kill us all) *** 
                
               * End of the World *
There are some reasons if the End of the
World may be happened
  1. Gravity power of the Planets will go down week.
  2. On the base of calculation mathematically regarding the year 2060
    ( Source- The National Liberty of Israel )
  1. It is writtenlly given on a Paper in 1704 by Sir Isaak Newton on the Specific Piece of Paper. There are 7 points of reason to explain it that is why the world will be End in 2060
  2. Basis of the ( Book of Daniel ) that focuse on the Humanity, from a religious Perspective and " Biblical apocalypse " and how this may happen
                          ***************
  1. Sir Isaak Newton also believely said that believing in both scientifically, Dainly and religiously the End of the world will happened and end of the Humanity will happened. Our Society's members also discuss on it that it seem the end of the World is near.
  2. Sir Elbert Einstein also belive both scientifically and religiously run each-other in Philosophically and also believe in " God Devotionally " and that dew some reasons Global Warming will happened in Space and End of the World is NEAR in future.
  3. Sir Stephen Hawking also predicted that the World will end. When he was solving the Mysteries of Black-Holes and revolutionizing theorical Physics.
   " Earth will turn into a Giant-Fire-Ball "
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         Sir Hawking warned last July that

   ( Humanity is at a " TIPPING-POINT" )

      He added that Global Warming would           Cause the Earth to become like Venus           with Global temperature of 482                    degrees Fahrenheit and Sulphuric 
      Acid- Raining from the Sky. And Said :--        " I afraid that all may replace humans          altogether "

       *** Nuclare War could kill us all ***


           It seems after collide two black astroid in universe then spark going on during the crossing and coming to Earth
 to me in I D U
Natural Disaster

Divine Eyes 5-8-22 at 3-00am


















Tuesday, November 2, 2021

Grace of God

                      



* प्रभू कृपा *

प्रभू कृपा से अभिप्रय:--

  1.   Grace of God :-
             आज हमारे देश में दीपाली का त्योहार है जो त्रेता युग से बडे धूमधाम से मनाते आ रहे है। घरो को साफ सुन्दर और दुल्हन की तरह सजाया जा रहा है और श्री सीता सहित श्री राजा राम के अयोध्या लौटने पर आपसी प्रेम में घर- घर  जाकर मिठाइयां बांटी जा रही हैं हमारा देश प्रिय: भारत देश एक दिव्य देश है, यह ऋषी मुनियो और अवतारों की पवित्र धरा है। यहां जब से सृष्टि बनी भगवान अवतार लेते आए है। अध्यात्मिक दिव्य, ब्रह्म ज्ञान से अपनी छटां बिखरते आए है जिससे विश्व में शान्ति बनी रहे।  दवापर युग में परम अवतार श्री कृष्णा, प्रभू श्री नारायण के अवतार थे। उन्हें दिव्य नारायणी देह प्राप्त थीं, ने अर्जुन को उपदेश देते हुए कहते है कि, हे अर्जुन मनमना-भव और ध्याने से सुन, यह ब्रह्म-ज्ञान जो आज मैं आप को कहने जा रहा हूं सृष्टि के आरम्भ मे सबसे पहले मैने सूर्य को दिया, सूर्य ने मनू को दिया, मनू ने इस्वाकू को दिया, इस्वाकू ने राजा रघू को दिया, और रघू ने त्रेता में राजा राम को दिया और फिर राजा सत्यवर्त ब्रह्म-ज्ञानी हुए , राजा हरीश्चन्द्र धर्मावतार हुए, राजा रिषिभ तात्विक पुरुष हुए, देव आदि-देव इन्द्र देवता भी, दिव्य शक्तियों का बहुत अनुभव रखते थे। दवापर में सभी गौप, गोपनियां तथा राजा वीर विक्रमादित्य ब्रह्म ज्ञानी हुए, पृथ्वि पुत्री श्री सीता जी, अग्नि पुत्री दुर्गा स्वरूप श्री द्रोप्ती जी, श्री गंगा माता जी, यह सब पर काया प्रवेश शक्ति से विभूषित थीं, इतना ही नहीं सत्युग में एक आगासुर और बागासुर नाम के देवता हुए जो पृथ्वी में से मिट्टी मे से प्रकट हुए। भग्ति करनी है तो ऐसी अनन्य भग्ती करो जैसी सत्युग में आगासुर और बागासुर ने की। ध्रुव भग्त ने की, भग्ति कर अपना दाग जिगर का धो लिया, प्रल्हाद भग्त नें की लोहे के गर्म खम्बे पर चीटिंयां चलती नजर आई अत: हर युग में भग्ति success हुई है। रघूनन्दन से लेकर आज तक यह रघू कुल रीत सदा चली आई, चली आ रही है। हम आज भी यह दीपावली का पर्व, श्री राजा रामचन्द्र जी की याद में बडी धूमधाम से मनाते आ रहे हैं यह सब भगवान की विशेष कृपा ही तो है ।




  2.  Grace of God:-
  
               ध्यान रहे; God तो अपनी कृपा का अहसास The grace of God अपने true devotee of God यानी, अपने परम भग्त को करा सकते है क्योकि वह तो सृष्टि के मालीक हैं, अन्तर्यामी हैं। because it is the matter of self realization, इस लिये कोई भी कितना ही बडा गहरा परम भग्त हो, ज्ञानी-ध्यानी हो, योगी पुरुष हो, दिव्य पुरुष हो, वह भगवान की कृपा का अनुभव, किसी दूसरे जीव या प्राणी को नहीं करा सकता, भगवान अपने परम भग्त पर किस क्षण कृपा करें यह किसी को कुछ नही पता, वह तो खुद ही अनुभव करना पडेगा। जब भगवान की कृपा होती है भग्त के रोंगटे automatically खडे हो जाते है, अस्रू धारा बहने लगती है, आंखों के कौपले सूज जाती है, न खाने पीने की शुद्ध रहती है न नहाने- धोने की शोच समझ, न हंसने का पता न रोने की होश, भग्त का हृदय तो बस भग्वान के चिन्तन और मनन मे ही पिघला रहता है और प्रभू कृपा को ह्दय से चिपकाये रखता है भगवन भूखे भाव के, और भग्त तो " श्रद्धा भग्ति भाव प्रेम रस में डूबा रहता है " वह तो अनन्य भग्ति में मनमुग्द्ध रहता है। विलक्षण, अद्धभुत गहरी अनन्य भग्ति द्वारा अजीबो बरीब परमानन्द की प्राप्ती होती है लेकिन कोई भी  ऐसी भग्ति का व्याखान नहीं कर सकते। ऐसी कृपा को समझना बहुत ही कठिन है। गोपनियों ने दवापर में ठीक ही कहा था कि ऐ *ऊधो* प्रभू के प्रति जो हमारा प्रेम है उसे समझना बहुत मुय्किल है आप नहीं समझ सकते। परम भग्त भग्ति करता हुआ, नि:श्काम कर्म करता हुआ, जीवन में अग्रसर होता है! हां स्वयं के आत्मतत्व का बोध होने पर, आप दूसरे को भग्तिमय मार्ग दर्शाने का सुझाव तो दे सकते है, कृपा को दर्शा नही सकते। प्रभू बडे दयालू हैं, दयानिदान है, करूणा के सागर हैं, दया के सागर हैं, बडे कृपालू हैं, हो सकता है मालिक आप पर अपनी अनुकंपा कर दें और आपको उनका दिव्य रूप का साक्षात्कार हो जाय। जैसा कि हमने आपको बताया है यह self realization का विषय है। बहुत कठिन है डगर पनगट की।

 यह तो प्रेम की बात है ऊधो,  बन्दगी तेरे बस की नहीं है
 यहां सर देकर होते हैं सौदे, आशकी इतनी सस्ती नही है

               यह भी गहरे लम्बे ध्यानयोग में जाने पर जब हमारा अंत; कर्ण शुद्ध हो जाता है उसके पश्चात Atom-Tattav के पवित्र होने पर, व्यक्तिगत्त आत्म तत्व का बोध होने पर, तत्त्व, जो परम आनन्द मयी प्रकाश की शान्तिमय किरणे हैं waves of Peace जो स्वयं के तत्व का अनुभव होने पर अर्थात, प्रभू कृपा होने पर, स्वयं का आत्म बोध द्वारा ही अनुभव में आती है और जब प्रभू कृपा हो जाएगी तो सभी दिव्य शक्तियो के प्रकट होने पर जैसे कि Divine Vivek Power, Divine Ora, Divine third eye, Sudershna Chakra, Divine Turiya-kripa, Divine Light, दिव्य पून्य आत्मन दर्शन, आदि सभी दिव्य शक्तियो का भी  बोध स्वयंमेव हो जाएगा, बस प्रभू भग्ति करते हुए स्वयं को समर्पित करना है अर्थात * कुल सार-सत्त यह है कि ईश्वर को भली भांती खोज करने पर हमें, we should surrendered to God him-self being introvert and to seek nicely of Him- "NARAYANA *" जो भगवान की अनन्य भग्ति करते हैं उन पर विशेष कृपा अवश्य होती है, लेकिन दिखाई नहीं देती,  प्रभू कृपा उनके जीवन में अवश्य आती है। प्रभू प्रेमी महशूस कर लेते हैं कि प्रभू कृपा उन पर भरष रही है। और जो अपने स्वयं के आत्म तत्व को ही अपने अनुभव में नहीं ला पाते वह परम-तत्त्व को कैसे अनुभव में ला सकते हैं जो स्वयं के आत्म तत्व को अनुभव में ला सकते, वही प्रभू कृपा का बोध कर सकते हैं 

  जा पर कृपा  राम  की होईं, तापे पे कृपा करहीं सब कोई
  जिनके कपट दम्भ नहीं माया, ताकी हृदय बसहीं रघुराया

            इस समस्त भ्रमांड में, इस दिव्य अद्धभुत सुन्दर सृष्टि की सृष्टियों की सृष्टियों मे, तीनो लोकों में, हम अपनी भौतिक नेत्रों से जो अवलोकन कर रहे हैं और हम अपने दिव्य नेत्रों से अन्तर्मुखी होकर गहरे ध्यान योग अवस्था में जाकर जो दिव्य अनुभव कर सकते हैं, हमारे मन की आंखों की सूझ व सोच रखने की क्षमता जहां तक है, यह सब प्रभू कृपा ही तो है। जो हम अपनी आंखों से इस पवित्र धरा पर अनुभव कर सकते हैं, देख सकते हैं, देख रहे हैं, प्रकृति का सोन्द्रिय, प्रकृति की रसना, व समस्त सामग्री, प्राकृति के समस्त तत्व के गुणों से प्रभावित सूख-दु:ख, सुगन्ध, रस, तप, मिठास, आत्म तत्व के समस्त दिव्य प्रभावित सात्विक गुण जो हम बाह्य व आन्त्रिक दिव्य सृष्टि में अनुभव कर सकते है यह सब कुछ प्रभू कृपा ही तो है। all Is Grace of God. अगर इन समस्त कृपा को अनुभव में लाना है तो हमें स्वयं के आत्म तत्व का बोध करना होगा।                


 3. For Example:--

               जिस प्रकार विद्धुत की तार में power दिखाई नहीं देती लेकिन touch करने पर पता लगता है कि कितनी शक्तिमय power है, चुम्बकीय शक्ति दिखाई नही देती लेकिन लोहे के टुकडो को अपनी ओर खींचने की क्षमता रखता है, अब Gravity power को ही लें, समस्त ब्रह्मांड के planets, galaxies, Sun, Moon, Stars, ब्रह्मांड की समस्त समाग्री  gravity power पर ही तो  depend करती है इतना ही नहीं Scientifically तौर से Atom activation and Cosmic waves realization भी प्रभू कृपा होने पर एक true devotee of God के जीवन में, in I D U में, अनुभव हो सकती है, लेकिन प्रभू- कृपा दिखाई नही देती, यह सब प्रभू क्रिपा होने पर ही तो अनुभव में आ सकती है, जैसे दूध मे मक्खन दिखाई नही देता पर दही जमाने के बाद उसे रिडकने पर मंथन होने पर मक्खन प्रकट होता है , जैसे लकडी की तिल्ली में ज्वलन शक्ति है पर रगड खाने पर प्रकट होती है, जैसे बादल में बादल टकराने पर भयंकर आकाशीय बिजली प्रकट होती है पर बादल में power दिखाई नही देती है तो भग्वान की कृपा भी प्रभू भग्तिमय भग्त के हृदय में भी कृपा गुप्त रूप में लुप्त रहती है पर दिखाई नहीं देती जो after long practice of yoga and deep meditation  का प्रयास करने से, स्थिरप्रज्ञ होने से और Kundalini Shakti Activate होने पर ही अनुभव हो सकती है, अर्थात अन्तर्मुख होने के बाद और विकार-मुक्त व गुणातीत होने के बाद और सभी भग्ति मय प्रयास करने पर ही Holy soul होने पर, स्वयं के आत्म तत्व के बोध द्वारा Grace of God होने पर ही internal divine universe में 'सुक्ष्म बिन्द, और प्रकाशमय किर्णों के रूप मे Atom Tattav के चारों ओर as a Cyclone waves के रूप में जो प्रकाश रूपी प्रभू कृपा है अनुभव हो सकती हैं। ( जब पृथ्वि के अन्दर दो Plates की पर्ते नीचे आपस मे टकराती हैं, रगड खाती हैं power of cyclone प्रकट होती है, तो पता है क्या होता है, भूकंप का कारण बनता है पूरा Earth हिल जाता है इतनी शक्ति इसमें छीपी है जो दिखाई नहीं देती या Valcano के विष्फोट होने पर ऊपर आने पर महशूस होती है, जो प्रभू कृपा के कारण लुप्त रहती है समय आने पर ही प्रकट होती है, यह लुप्त ही रहे तो ठीक otherwise आपको पता है गडबड हो जाएगी ) happened As a cyclone,  स्थिरप्रज्ञ होने पर जिसके center में Atom-Tattav जो अणु के रूप में स्थित है को, प्रभू कृपा होने पर
ही अनुभव कीया जा सकता है, यही Grace of God है।
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                              * In Fact *
" Every thing you have, is nothing yours "


         * मेरा मुझमें कुछ नहीं,  जो कुछ है सो तेरो *
            
          इस अद्धभुत सुन्दर भौतिक संसार में अनमोल जीवन मिलने से लेकर आज तक जो भी भौतिक दृष्टि से सुख, दुख ऐश्वर्य, धन, दौलत, प्रोपर्टी में हम जो भी अपनापन महसूश कर रहे हैं, यह सब प्रभू कृपा ही तो है, प्रभू की देन है, हमारा इसमें कुछ भी नही है। एक दिन यह सब यहीं रह जाएगा। केवल अनन्य भग्ति करने पर divine inner world, में परम तत्व का, स्वयं के तत्व से मेल होने पर जो दिव्य कृपा हुई हैं, दिव्य अनुभूतियां हुई है, परम सत्य से योग हुआ है, बस यही प्रभू कृपा है जो हमारे जीवन में शुभ अनुभूती है जो जिवन्त साथ रहने वाली है। भगवान की कृपा के बिना तो इस सुन्दर सृष्टि में, और सभी जिवन मय सृष्टियाओं में जो सृष्टियां हैं उनमें और चारों ओर, अंथकार ही अंधकार है। भगवान ही तो अपनी कृपा से इस सुन्दर सृष्टि को रोशन-मय enlighten कर रहे हैं यह दिव्य प्रकाश ही प्रभू कृपा है। हमें भगवान ने यह अनमोल जीवन वरदान के रूप में शुभ कार्य करने के लिये प्रदान किया है,  हमें इसे व्यर्थ नहीं ग्वाना चाहिये। इसे प्रभू भग्ति मे लगाते हुए सद्उपयोग करते हुए, सनातनी, धार्मिक व सात्त्विक कर्म करते हुए, जो हमारा जीवन जीने का एकमात्र उद्धेश्य है, निश्काम कर्म करते हुए, निश्काम भग्ति करते हुए गहरे ध्यान योग द्वारा प्रयास करते हुए, प्रभू जो हमें नित्य प्राप्त है, स्वयं के आत्म बोध द्वारा अनुभव करते हुए परम तत्व से योग कर, प्रभू प्रेम में समर्पित होते हुए, अपने जीवन को सफल बनाना चाहिये।
                     * Grace of God *




             Om Tat Sat
                  *****
                                      दास अनुदास रोहतास

Tuesday, October 26, 2021

Metamorphosis by Rohtas





मुमुक्षु से अभिप्राय:----                                               
                           पीछे हमने मुमुक्षु पर discussion.   किया था। कि when a true divotee of God doing long practice of yoga in deep meditation like as Austung yoga Yom- Niyam- Assan- pranayam- Pratayahar, Dharna- dhyan Smadhi and  " Purak-Kumbhak-Rachak "  have more importance to stable our Breath and after concentrating on all these kriyas then ANAHAD-NADH and Amrit-Raspan is very compulsory to be STABLE-MIND-SITHIR-PRAGIYA, to know Himself, to know and realize Self-Atom-Tattav. स्वयं के तत्व के बोध होने पर हमने जिकर किया था मुक्ति व मोक्ष का,भग्ति मार्ग का रास्ता तो एक ही है इस लिये इनके बीच में आने वाली हर बातों को भी ध्यान में रखना होगा।


            अब स्वयं के तत्व का बोध हो जाने पर स्थित प्रज्ञ होने पर अनन्य भग्ति करते हुए, भगवान की शर्णागत होते हुए, हम सभी दिव्य चक्रों को cross करते हुए, आगे बढेगे और तत्व का परम-तत्व से योग होने पर after Grace of God प्रभू कृपा होने से, re-birth या re-incarnation होने पर हम स्वाधिष्बटान चक्र पर भगवान के कृपापात्र के रूप मे विराजने पर MUMUKSHU कहलाने का गौरव प्राप्त हुआ। और अब प्रभू कृपा पाकर mumukshu दिव्य रूप से स्वतंत्र होने पर, जीवंत-परायण: अपनी आगे की Divine Journey , Metamorphosis, दिव्य शक्ति क्रिया जो secrecy of God powers है की सहायता से शुरु करेंगे जो हमारा आज का-- ध्येय विषय है ।
      वैसे याहां ध्यान देने की बात है:-
                जिवात्मा अनन्य भग्ति करता हुआ, तत्व के पवित्र होने पर kundalini Shakti के Activate होने पर जो परम तत्व से योग हुआ है यह Metamorphosis Power Kiriya की सहायता से ही हुआ हैं। यहां पर *पर-काया-प्रवेश* होने पर ही मुमुक्ष कहलाने का गौरव प्राप्त हुआ है जो केवल, only after Grace of God प्रभू कृपा होने पर ही हुआ है यही तो Metamorphosis Divine Kriya पर काया प्रवेश क्रिया है। जब से सृष्टि बनी तब से लेकर आज तक यह कृपा होती आई है अब देखना है कब कैसे किस पर पर काया प्रवेश रूपी प्रभू कृपा हुई है।
          कुछ ऐसी महान आत्माओं के दिव्य अनुभवों पर प्रकाश डालते है जिन्हे पर काया प्रवेष Metamorphosis Shakti का अनुभव हुआ। 
1 सुनने में आया है, नाथ सम्प्रदाय से आदि गुरु मुनिराज मछन्दरदास जी, जो गुरु गोरख नाथ जी के गुरु थे, Divine Metamorphosis, पर काया प्रवेष क्रिया में काफी अनुभव रखते थे।
2 आदि शंकरा चार्य को भी " पर काया प्रवेष " क्रिया का अनुभव हुआ था।
3 महाभारत के शान्ति पर्व मे भी पर काया प्रवेष क्रिया का जिकर है, कि एक शुलभा नाम की विदूषी अपने योग बल  Metamorphosis शक्ति से राजा जनक के शरीर मे परविष्ट कर विदूवानो से आगे बढ चढ कर शास्त्रार्थ करने में माहिर थी, जिससे उन दिनो राजा जनक का वयवहार भी प्रजा में चर्चा का विषय बना हुआ था।
4 दवापर युग में धनुरधारी अर्जुन के बेटे वीर अभिमन्यू की पत्नि उत्तरा गर्व से थी, जिसके पेट में राजा परीक्षित के रूप में पांडवो का वंशज पल रहा था । द्रोणा चार्य के पुत्र अस्वथामा ने उसे ब्रह्म अस्त्र के प्रयोग से खत्म करना चाहा लेकिन भगवान कृष्णा ने अपनी दिव्य शक्ति शुदर्शनचक्र का प्रयोग कर उसे बचा लिया और रक्षा की। इतना ही नही श्री कृष्णा ने अस्वथामा के मस्तक मे जन्म से जो दिव्य मणी प्राप्त थी, उससे वह भी छीन ली।

कहते हैं :-     " जाको राखे साईंया मार सके ना कोई "

5 राजा वीर विक्रमादित्या के पास भी दिव्य शक्ति पर काया प्रवेष का अनुभव था और जसकी सहायता से कई बार अपना शीश चढाया
6 दवापर मे श्री कृष्णा के पास भी यह दिव्य शक्ति थी कई लोक परलोक मे गमन किया। 
7 श्री राम चन्द्र जी को भी इस दिव्य शक्ति का सनुभव था।
8 हनुमान जी के पास भी थी यह शक्ति थी 
             इस पवित्र देव धरा प्रिय: भारत देश में हर युग में महापुरुष हुये हैं जिनको अपने जीवन काल में इस ्दिव्य शक्ति Metamorphosis का सद्उपयोग करने का मौका मिला है,  यह एक दिव्य क्षणभंगुर शक्ति है जो एक क्षण में कहीं भी जंहा केवल प्रभू की इच्छा होती है प्रकट हो सकती है और प्रभू इच्छा अनुरूप Metamorphosis की सहायता से प्रभू कृपा होने पर आत्म तत्व " कारण शरीर " से प्रकट होने में सक्षम होता है और वापिस अपना शरीर ग्रहण करने में सक्षम होता है। आज भी इस युग में ऐसी महान दिव्य आत्मायें, दिव्य योगी महापुरुष, खोज करने पर मिल सकते हैं।

* Secular Spiritual knowledge Based on         Personal Experience *    
 

               
                                        दास अनुदास रोहतास

Wednesday, September 29, 2021

🌷Mumukshu🌷

        * Mumukshu Avatar Rohtas *

              


Mumukshu:---
Grace of God is very complesorry
Fast determination 
Self confidence
Purify of Mind
Devotional Spirit 
Holiness of Soul
Self prectic in Yoga
Self realization of Atom-Tattav
We should Sorender to God himself 
                  *************
        * Concentrate on Body *
                        --------------
1 संस्कार=  अच्छा परिवार, पडोस, देश 
2 शिक्षा=     संस्कारी माता-पिता, टीचर, बुजुर्ग, बडों से
3 गुरु=        अध्यात्मिक व धार्मिक ज्ञान
4 सत्संग=    सत्संग व सनातन धर्म को अपनाना
5 दिनचर्या= आहार, व्यवहार, उठना, बैठना, खान, पान                        सोना जागना
6  योगा अक्सर्साईज, सूर्य नमस्कार, प्राणायाम, प्रत्याहार         धारणा ध्यान, समाधी कुम्भक, रेचक आदि योग आसन       क्रियाएं ।
            * नि:श्काम् क्रम योग,  निश्काम ज्ञान योग, *                    * निश्काम भग्ति योग+निश्काम ध्यान योग * 

                 " भग्ति कैसे करे " भग्ति के मार्ग "

        1  वेदो के अनुसार भग्ति - नाम योग द्वारा 
            कलयुग केवल नाम आधारा-सुमिर सुमिर नर                    उतरीं पारा !     
                                           * राम चरित मानस *
            ऊमां कहूं मै अनुभव अपना, सत्य हरि भजन                    जगत सब स्पना ।
                                                * शिव पुराण *
       11  चिन्तन, मनन, जप, तप, यज्ञ नाम सिमरन व                     अनन्य भग्ति
       111  ध्यान रहे तत्व हमे जो नित्य प्राप्त है को केवल                    अपने अनुभव मे लाने का प्रयास करना है 

              " एक साधे सब सधे   सब साधे सब जाये "                                     ------------------------
   * Concentrate on Body Sense Organs *
                           --------------
7 अष्टांग-योग = ( यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार,
                         धारणा  ध्यान. समाधी )
8 सृष्टि=  जड+चेतन, पुरुष+प्रकृति
9 तत्त्व= आत्म तत्त्व+चेत्तन तत्त्व, व प्रकृति के पांच  तत्त्व-              आकाश, वायु, पृथ्वि, अग्नि, जल 
10 कर्म इन्द्रीयां= हाथ, पैर, कान, नाक, तवचा, मुंह,आंख,                सिर, शरीर ।
11 ज्ञान इन्द्रियां= आंख, कान, जीभा, त्वचा, नाक, 
12 भावनात्मक गुण=काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार,            मन, बुद्धी, ज्ञान और अहंभाव। भौतिक संसार की              उपरोक्त सभी मनोवृतियों से विमुख होकर और                  Inner Divine World में अन्तर्मुखी होते हुए,              गहरा ध्यान योग द्वारा, मन को एकाग्र करते हुए, 
      स्थिर प्रज्ञ होते हुए, अपने स्वं के अंत: कर्ण में बैठे,              व्यक्तिगत आत्म तत्त्व का बोध करने का प्रयास करना          ही, स्थिर प्रज्ञ होने का प्रयास है।

     * बहुत कठिन है डगर पनघट की, कैसे मै भर लाऊं              मधवा से मटकी *
                                           * दवापर युगे *

           कबीर मन तो   एक है     भांवे जहां लगाये, 
           भांवे गुरु की भग्ति कर,  भांवे विश्व कमाये।

             * Concentrate on Mind *
                           ---------------
13 सरल आसन पर बैठ
14 गहरे ध्यान योग द्वारा
15 स्वाश क्रिया रोकने का अभ्यास
16 अनहद-नाद्
17 कास्ट-सिद्धी 
18 अमृत- रसपान
19  स्थिर-प्रग्य होने का प्रयास Concentrate of                  mind, Consciousness and Stability of            Mind is very compulsory to be                        GUNATEET.

          मिटादे अपनी हस्ति को अगर कुछ मरतबा चाहे,
          कि दाना खाक में मिल कर गुलोगुलजार होता है
                ‌                                 * गालिब *
          अपने आपको मिटाना पडता है अपने अस्तित्व
          को मिटाना पडता है तब जाकर प्रभू कृपा होने पर              स्वयं के तत्व का बोध होता है।                                                                                      
20   कुंडलिनी शक्ति सक्रीय Activation:-
       अब दिव्य आदि शक्ति Kundalini Activate
       हो Long Divine Light appeared हो गयी,             इसके साथ साथ Perubh-Jiyote Activate हो           गयी, सभी दिव्य Chakra activate हो गये। यहां           तक यह सब ब्रह्मज्ञान है। आगे स्थित-प्रज्ञ होने पर,             दिव्यत्ता आने से परम ज्ञान है 
21 स्वं के आत्त्म तत्व का बोध होना
22 स्थित-प्रज्ञ होने पर दिव्यत्ता का अनुभव होना
23 तत्त्व+परम तत्तव से योग होना।
24  Grace of God होना।
25 Mumukshu :-   
               यहां तक सब परम ज्ञान है Dew to Grace of God तत्व के re-incarnation (re-birth) होने पर पात्रता प्राप्त होने के बाद अब यह दिव्य आत्म तत्व जब स्वाधिष्टान चक्र में ब्रह्मकमल की जगह पर स्थान ग्रहण कर लेता है तो मुमुक्षू के नाम से जाना जाता है। आदि Lord God भी यही है। यही मुमुक्षू है। देखिये यह दिव्य मुमुक्षू पद् जब से सृष्टि बनी तब से लेकर आज तक सभी जीवंत प्रायण हैं, और मोक्ष पद् का अधिकार भी सभी दिव्य महान आत्माओं को प्राप्त है, जो प्रभू कृपा अनुसार उन्हें जो सम्मानित स्थान सौंपा गया, वहीं विराजमान हैं, आज तक Mox किसी को भी नहीं मिला। उसका कारण स्पश्ट है " सृष्टि की नीयम बद्ध रचना है "

  All the creations are created by The Almighty God automatically, sistematically and divinely in this beautiful Shristy. 

       अगर किसी एक को मोक्ष मिलता है तो सृष्टि की कडी टूट जाएगी और प्रलय का कारण बन जाता है। हां महाप्रलय तक सबका मोक्ष पद् का अधिकार बाइज्जत्त सुरक्षित रहता है और अंत में सभी Great divine Living Souls प्रभू इच्छा व सृष्टि के नियम अनुसार सृष्टि-चक्र पूरा होने पर महाप्रलया: के समय सब शान्ति धाम को प्राप्त हो जाऐंगे।
मोक्ष आज तक श्री सूर्य देवता, lord श्री ब्रह्मा जी, श्री Lord श्री विष्णु जी, Lord श्री महेष जी, देवादिदेव श्री ईन्द्र देवता जी आदि देवताओं को व लार्ड श्री राम, लार्ड श्री कृष्ण, व Lord श्री हनुमान जी तक किसी को भी नही मिला,  हां Great Holy Spirits, जितनी भी पवित्र आत्माऐं हैं और परम तत्त्व से योग होने पर Re-Birth मिला हुआ है, सभी को सम्मान्नित मोक्ष पद्ध का अधिकार अवश्य प्राप्त हैं और आज तक सुरक्षित हैं।

26  Maha-shakti Turiya:-    

           और अब मुमुक्षू, परा शक्ति - Divine Power Turiya क्रिया की सहायत से, दिव्य बेतरणी के रास्ते, दिव्य भव-सागर को पार करता हुआ, स्वभाविकली-Naturally and Divinely, Tattav अपने मूल-परम-तत्व से योग कर लेता है। प्रभू कृपा होने से मुमुक्षू को अब, सभी दिव्य शक्तियां प्राप्त हो जाती हैं, यही लोर्ड त्रीमूरती, त्रीदेव, त्रीगुण मायाधारी ईश्वर हैं। फिर भी हमें भूलना नहीं चाहिये कि हम भगवान की कृपा के पात्र हैं, भगवान तो भगवान है, कोई भी जीव, प्राणी भगवान नहीं हो सकता।
 हां मालिक की कृपा का पात्र होने के नाते, आत्म तत्व के स्वत्न्त्र व परमहंस होने पर, भगवान की दिव्य लीलाओं को अवलोकन करने का सुअवसर अवस्य प्राप्त हो जाता है। अब प्रभू कृपा होने पर क्षण भंगुर होने से दिव्य आत्म तत्व Divine Power Matamorphsis के सक्रिय होने का सदुपयोग कर, * तत्तव दर्शी जीव * दिव्य अनुभवों से परमानन्दित हो सकते हैं। जो एक अध्यात्मिक महान दिव्य राजयोग आत्म-तत्त्व लीला है। हम सब प्राणीयों का इस अद्धभुत, सुन्दर, दिव्य, पवित्र धरा पर यह जो अनमोल जीवन पाने का शुभ अवसर प्राप्त हुआ है, हम सबका परम उद्धेश्य बनता है, अनन्य भग्ति करते हुए, स्वयं के आत्म तत्व का परम तत्व से योग कर, ईश्वर की भली भान्ति खोज कर, उसे समर्पपित होते हुए, परम पिता परमात्मा "Narayan" की खोज कर, उसके शर्णागत्त होना।

      Universal Truth  &

               Secular Spiritual knowledge






Das Anudas Moxanandhit Mumukshu Rohtas


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Monday, September 27, 2021

Shristi Chakra

     Shristi Chakra 

Shristi Chakra realized by Rohtas at 00-30 am on 9-9-21 during meditation in I D U.



Sunday, September 5, 2021

🌷 Param Tattav Gyan 🌷

       * Param Tattav Gyan by Rohtas *

Difference between Supreme Tatta & Normal Tattavs



                    Dad Anudas Rohtas

Sunday, August 29, 2021

🌷 Param-Gyan 🌷

 🌷 Param-Gyan by Rohtas 🌷

We realized clearly Lord Krishna's Darshan in His beautiful Divine Mohini Roop in  golden clour dress, during meditation, in the 8-Feets height of His Body, at 2-30 am on 30-8-2021 at the occasion of our Fevraite Historical Festival Janamastami coming slowly towards me in our Inner Divine World.



Wednesday, August 18, 2021

Brahm-Gyan ब्रह्मज्ञान

       Brahm-Gyan




We personally realized during 'Sun Assan Yog Kirya' in meditation, Slowly Divine imotional activation of our Body's sense organes in 1976

      *  ब्रह्मज्ञान  *

सन् 1976 में सूर्य नमस्कार आसन योग क्रिया के दौरान व्यक्तिगत-अनुभव द्वारा ध्यान में हमने अपने शरीर की कर्मिन्द्रयो व ज्ञान इंद्रियों की धीरे-धीरे दिव्य चल भावनात्मक सक्रियता को महसूस किया और फिर:-

1 दिव्य लाईट आंगन में
2 अनहद्-नाद
3 दिव्य विस्फोट in I D U
4 काष्ट सिद्धी
5 अमृत-रसपान
6 स्थित-प्रज्ञ
7 तत्व अनुभव in I D U

यहां तक ब्रह्मज्ञान है आगे तत्व-स्थित-प्रज्ञ
अवस्था होने पर जो एक शुन्य अवस्था के
समान है परम से योग होने पर परम-ज्ञान
अवस्था हो जाती है और परमकृपा होने से परम के सभी दिव्य गुण अवतरित हो जाते है जो अनन्य भग्ति करने पर  ईश्वर की उसके एक परम स्नेही भग्त जन पर होती है यही परम भग्ति है यही परमज्ञान है।




Thursday, August 12, 2021

* परम-ज्ञान * परम-सूत्र क्या है ?

           * Param Tattav Realization *


  * परम-सूत्र क्या है ? * 

  * What is the Ultimate Formula ? *

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  परम-ज्ञान क्या है ?

  स्थित प्रज्ञ - परम ज्ञान:-----

              ध्यान रहे:--  सृष्टि के प्रारम्भ में  " First of all Supreme God created the creation of The Formatted God similar to Him. अध्यात्म में जो "Lord Adhi God" आदि भगवान के नाम से जाने जाते हैं इसी आदि लार्ड गोड ने आगे चलकर इस अद्धभुत सुन्दर सृष्टि की, प्रकृति एवं पुरुष, जड एवं चेत्तन, की रचना की,  आदि गोड जो आंशिक-तत्व के रूप में, सभी जीव, प्राणियों, ( सुक्षम सृष्टियों ) के हृदय में आंशिक रूप में जो जन्म से नित्य प्रापत हैं, विद्धमान है। क्योंकि The Formatted God, आदि लार्ड गोड, त्रीमूर्ती भगवान हैं और सृष्टि के रचिता लार्ड ब्रह्मा जी हैं, जो ईश्वर द्वारा खुद अपने आप की मात्र एक रचना हैं, Creation of The God हैं तो यहां हमें केवल स्वयं के आंशिक आत्म तत्व का बोध ही हुआ है, और स्थित प्रज्ञ होने पर तत्व का परम तत्व से योग होने पर प्रभू कृपा होने पर, परम तत्व के सभी दिव्यगुण अवतरित होने पर ही परम तत्व दर्शी कहलाने की योग्यता प्राप्त हो सकती है।* क्योंकि आदि गोड लार्ड ब्रह्मां जी ने  इस सुन्दर सृष्टि की रचना की है जबकि ब्रह्मा जी खुद ईश्वर की एकमात्र रचना है।* यही आंशिक तत्व और परम तत्व का अन्तर है * पहले आप आंशिक तत्व अंशी थे और अब आप परम तत्व अंशी हो गये और अब परम तत्त्व से योग होने से आप सभी दिव्यगुण सम्पन्न होने से आप भगवान के दिव्य लीलाओं को अनुभव कर सकोगे, यहां पर अहंभाव नहीं आना चाहिये। हम तो भगवान के एकमात्र कृपापात्र हैं।  सरलता बनी रहनी चाहिये। भगवान तो अपने दिव्य अक्षांश पर स्थाई रूप से विद्धमान हैं। Secrecy of Supreme Tattav बहुत गहरा भेद है जब महापुरुष भग्तो के बीच में अक्षर: इस विषय को रखते हैं तो आगे से जवाब मिलता है " महाराज जी तो फिर भगवान में और हमारे में क्या अन्तर है फिर तो हम भी भगवान हैं " बस यह वही अन्तर है। जिसका यहां पर जिकर किया गया । यह समझने का विषय है।


               अब जिस जिज्ञाषू, लग्नेषू प्राणी का आत्म तत्व, स्थिर-प्रज्ञ अवस्था को Cross, पार कर लेता है, समझो वही तत्व स्थित-प्रज्ञ हो गया। जो चेतन आत्म तत्व शांतधाम अवस्था शून्य अवस्था प्राप्त कर, जिसका परम तत्व प्रमात्मा से मेल हो गया, परममय हो गया, अर्थात राम मय हो गया, परम दिव्य अक्षांश पर स्थित हो Tattav का अनुभव हो गया,  यही * परम -ज्ञान * है। भगवान यहां ऐसी पुन्य आत्मा को मोक्ष पद् प्रदान कर, ऐसे जीव को, उच्च् पद प्रदान कर, उसे अपना जीवन परम आनन्द-सहित संसार में, महाप्रलय तक, किसी ऊंचे धाम का स्वामित्त्व सोंप, यहां इस सुन्दर सृण्टि में रहने को जीवन दान दे, सुअवसर प्रदान कर देते हैं।

    * त्रेता युग में राजा जनक का उत्तर अष्टावक्र द्वारा :-

   1 Qes----- ब्रह्म सूत्र क्या है ?

    Ans:---- वायु --- Air.

    *  दवापर युग में परम अवतार श्री कृष्णा सब जानते थे ।
        और अब भी अन्तर्यामी हैं सब जानते हैं

   2 Que:---परम सूत्र क्या है ?

   Ans :--आत्म-तत्व, सूक्ष्म, अणु, Atom @AvtariR            
   3 Que:--- शिव सूत्र क्या है ?

   Ans:--- सृस्टि मात्र जल है (H²O) । @AvtariR

  4 Que;---परब्रह्म सूत्र क्या है?

   Ans:--- Chettan- Tattav
         Metamorphosis with Consciousness 

   * अब प्रभू कृपा होने पर समस्त सूत्र आपके पास हैं *
  1.  स्थिर-प्रज्ञ अवस्था मे 5 ℅ Consciousness चेतनता रहती है      जबकि...........
  2.  स्थित-प्रज्ञ अवस्था जो जीव की शून्य अवस्था होती है में चेतनता consciousness केवल .1 ℅ दसमलव -01 ℅ परसैन्ट अवस्था रहती है। यहां जीव परममय हो गया । अब यहां भगवान की दयालुता ही जहां शेष बची है,  यही परम ज्ञान है, यहां जीव की मुक्त अवस्था् है, और मोक्ष पद् प्राप्त होने की अवस्था है। अब सब भगवान पर निर्भर करता है, परमेश्वर अपने परम अंशी जीव पर किस प्रकार की कृपा करते हैं ।
  3.  विशेषता:- -----    परम ज्ञानी आत्म तत्त्व-दर्शी बहुत सूक्ष्म से भी सूक्ष्म अनुभवी होता है यह क्षण-भंगुर होता है इनकी intellectual Divine power दिव्य-दृष्टा बडी तेज होती है, दूरदर्शी होते हैं । हमारा देश, प्रिय: भारत देश एक दिव्य देश है! इसकी अध्यात्मिक दिव्य संस्कृति व मर्यादा की गरिमा को बनाय रखना व समझना इतना आसान नहीं है! हमारे ऋषियों, मुनिजनों ने इसे अपने पवित्र दिव्य आत्मिक, अध्यात्मिक, धार्मिक पसीने से सींचा है। जो यहीं के प्राणियो महा परुषों की सूझ का विषय हो सकता है।
  4. " Yet it is the matter of Self-realization and The Grace of God "
  5.  यह MATAMORPHOSIS होते हैं। स्थूल शरीर में रहते, इनका कारण और सूक्ष्म दोनों दिव्य शरीर Active होते हैं वैसे तो कभी न कभी खास propose को लेकर इनका स्थूल शरीर भी कीसी अन्य प्राणी पर कृपा कर दिव्यत्ता की झलक दिखा देता है। यह भगवान के खास दिव्य आत्म तत्व धारण किये परम भक्त होते हैं।, यह क्षण भर में लोक- परलोक को अवलोकन कर अपने स्थान पर कायम रहते हैं भौतिक संसार मे इनको समझना, जानना बडा कठिन है परम तत्व के रूप में ईश्वर की विशेष कृपा इनके ऊपर होती है। इन्हें In I D U मे व्यक्तिगत अनुभव द्वारा ही अवलोकन किया जा सकता है। यह Introvertor होते हैं और कोई Introvertor दिव्य पुरुष ही इन्हे जान सकता है। यही परम ज्ञान है।   
  6.       और अब परब्रह्म: सूत्र क्या है, जो निम्नलिखित रूप मे नीचे दर्शाया गया है। यह लोर्ड परब्रह्म की माया है जिसे * पर-काया-पलट * के नाम से जाना जाता है। यही पर-ब्रह्म-ज्ञान।
  7. परब्रह्म - सूत्र :-                   

                                                                                   ‌‌‌                 दास अनुदास रोहतास

Sunday, July 11, 2021

Concentrate on Light

 Concentrate on Light by Rohtas since 1961


Concentration on Light



                          Das Anudas Rohtas


Friday, June 18, 2021

ब्रह्मज्ञानी व परमज्ञानी

🌷  सद् गुरु कृपा आत्मज्ञान से 🌷

Ans Comment's 17-6-21 by

       Barhim Giyani & Param Giyani

                      Shree Rohtas



परम स्नेही भग्त जनों, 

                                    सादर प्रणाम् ।

विषय :-राजा जनक ब्रह्मज्ञानी थे त्रेता में,

                                   ब्रह्म सूत्र क्या है ?

            अभी तो आप ब्रह्म सूत्र में ही उलझे हुए हैं, ब्रह्म सूत्र क्या है ? श्री वेद व्यास जी परम ज्ञानी थे, श्री कृष्णा परम के अवतार थे दवापर में, के अनुसार:- 

                                   परम सूत्र क्या है ?

            इसके बाद तो दवापर में लार्ड श्री कृष्णा का परम सूत्र भी अपनी दिव्य लीला अवलोकन करवा गये। और अब भी वर्तमान युग में भगवान अपनी नारायणी देह से प्रकट हो चुके हैं जिससे उनके कथनानुसार यह परम सूत्र का युग ही है।

              और अब सुना है महापुरुषों को दिव्य चेतन्तत्व, "चेतनत्ता" का आभाश होने जा रहा है जिससे परब्रह्म: सूत्र का युग शुरु होगा या हो चुका है अर्थात्:-

                                  परब्रह्म: सूत्र क्या है ?

              परम स्नेही भग्त जनों अभी तो अध्यात्मिक दृष्टि से हिन्दूईजम के अनुसार इस से आगे और भी बहुत से दिव्य सूत्र जानने बाकी हैं जो हम सबके लिये बहुत सुन्दर परम दिव्य ज्ञान से प्रेरित व महत्तवशील हैं जो भगवान के परम भग्तों, दिव्य पुरुषों, महात्तमनों, लग्नेषुओं और जिज्ञाषुओं के लिये जानना बहुत जरूरी है। जो ईश्वर की व्यक्तिगत अनन्यभग्ति व प्रभू कृपा व प्रभू प्रेम द्वारा ही अनुभव में आ सकती हैं।

                         दास अनुदास रोहतास 👏

Saturday, May 22, 2021

Viveki Purush Rohtas

* The Grace of God *

            In the religious and spiritual world of this wonderful, beautiful divine creation, from the physical point of view and inwardly, from the eyes of the mind, as far as we are observing this holy land in this illusion, is the grace of God.

                              Das Anudas Rohtas




Saturday, March 27, 2021

Lord Vishnu's Avatar

 Lord Vishnu's Avatar Rohtas




Divine Realization in I D U




Das Anudas Rohtas


 The movement in Universe is due to
 Black Hole

Friday, March 12, 2021

@ Lord Vishnu Avatar

          @AvtariR

Lord Vishnu's  Avatar Rohtas


Divine realization during meditation in internal divine universe being introverted







Thursday, February 18, 2021

🌷 Our Holy planet Earth may be in Danger🌷

        Jai Shree Krishna  Jai Shree Ram


   🌷 आदर्णीय परम स्नेही भग्त जनों सादर प्रणाम् 🌷

हमारी इस पवित्र धरा को globing warming  की वजह से खतरा हो सकता है।

             इस सुन्दर सृस्टि में दिव्य ब्रह्मांड के अन्दर स्थित हमारी इस अद्धभुत पवित्र धरा पर globing warming होने की वजह से दिन प्रति दिन जो खतरा मंडराता हुआ नजर आ रहा है विश्व के सभी वैज्ञानिक भी अपने लेखों से आगाह कर रहे हैं और इसके बारे में चिन्तित लगते हैं जल्द ही हमें होने वाले किसी अपिर्य घटना क्रम के महाविनाश से वचने के लिये आपसी समपर्क स्थापित कर सम्पूर्ण विश्व के वैज्ञानिकों और बुद्ध जिवियों तथा महपुरुषों को सझग रहते हुए, अपने अपने अनुभवि दिशा निर्देशों द्वारा अवगत् करा, बचाव में सामूहिक प्रयास करना चाहिये।
            धन्यवाद सहित
                       जय हिंद जय भारत
                                   दास अनुदास रोहतास

Tuesday, February 9, 2021

Divine Realization During Meditation

Please pay attention:-

This video is a Divine Self-Realization During Meditation and not Prediction

Beginningless and Endless Divine Flow of the Creations in Shristi 

         The main basis for the truth of the Shristi's three stages, Beginning, middle and end, is Black Hole.


 Next, We realized during meditation a brilliant planet at 04-15 am on 9-2-2021 in I I D U.


Das Anudas Rohtas
we realizing very strangely globing warming between black hole and galaxy during meditation in I D U

       🌷 कृपया इसे अच्छी तरह समझें 🌷
   
                ईश्वर क्षण भंगुर हैं तो प्रभू कृपा से, यह दिव्य सृष्टि भी क्षण भंगुर हो सकती है ! जैसा कि नीचे चित्र में
सभी Galaxy का अनुभव होना और फिर एक मिन्ट के बाद ये सभी Black Hole में प्रवर्तित होना फिर Galaxy और फिर Black Hole यह अजीबो गरीब सी क्रिया क्रमश: activation in galaxies & Blac-Hole हो रही है जो प्रभू कृपा से बार बार हमारे अनुभव में आई है।
  धन्यावाद सहित
                           दास अनुदास रोहतास


We realized Here Special shining light at first N.1, and in last very clear stary night
Now in n.5 is Normal .


Globing Warming realization during meditation








Oh...my...God...What a strange disturbance in Tectonick Plates realized during meditation on 19-4-21




                          Das Anudas Rohtas