Wednesday, April 26, 2017

True Love

                                       True Love
                        God is Love      Love to God

                  First Open internal divine universe then appeared some Divine Tatavs like Stars as in image No-1 in "Satya-Khand" in Upper Divine Universe and after some time we observed appearience of Divine Power, Divine Light, " DIVINE-FLAME " like as a light made cloud and lightly move in divine space, showing in as image-2, in inner divine Universe and then appeared our "East-Dave" in giving below image No-3. Lord Shree Krishna puting His Head to enjoye peacful Love in prayer's Hand of His True Devotee, or you can say "On Palms" at 4-30 am on 26-4-17. And after blessing peaceful love, to His Devotee, He disappeared after some time, during meditation.

" How Graceful Love ! "


                                         Das Anudas Rohtas

Monday, April 24, 2017

सर्वश्रेष्ट योग= भग्त + भग्ति + भगवान

                                     अनन्य भग्ति
                              भग्त + भग्ति + भगवान

सर्वश्रेष्ट योग

                 परम स्नेही भग्तजनों, सादर प्रणाम। लगता है, बहुत सुन्दर भग्ति योग का युग चला हुआ है, अब हमें भग्ति कर लेनी चाहिये। जितनी कोई प्राणी अपने जीवन में ज्यादा से ज्यादा मालिक के नाम की कमाई कर सकता है, अब बहुत उपयुक्त समय है कर लेनी चाहिये। हम काफी समय से कहते आ रहे हैं। यह वक्त जो गुजर रहा है, बहुत उपयोगी और कीमती है, गया वक्त फिर लौट कर नहीं आने वाला, आप खुद ब खुद समझदार हैं। जैसा कि आप सब जानते हैं ," भगवान की सत्ता तो नित्य प्राप्त है केवल अनन्य भग्ति द्वारा अनूभव करना होता है, भग्तिमय समय चल रहा है " भग्त+भग्ति+भगवान " इन तीनों के अद्धभुत योग का समय चल रहा है ये तीनों जब 90° के ऐंगल पर In Straight Line में होते है तो, "Divnity will be available On Line in Meditation" & Then it will be connected with Supreme Tatav, The Almighty God, और सीधा योग हो जाता है जो अति उत्तम योग होता है, यही सर्वश्रेष्ट योग है और परम आनन्द की प्राप्ति का भी यही सुगम समय है, आलौकिक व प्रालौकिक दिव्य शक्तियों का अनुभव व सभी लोकों का सुख एक जगह और परम आनन्द की प्राप्ति भी, एक ही जगह प्राप्त हो रही हैं, बहुत सुन्दर परम योग है, ऐसी सुन्दर परम दिव्य अनुभूतीयां, ऐसी सुन्दर दिव्य परम लीला, ऐसा परम सुख, ऐसा परम आनन्द, ऐसा परम योग न कभी हुआ होगा और शायद भविष्य में भी कभी नहीं होगा। On the other hand there is no End of Divine knowledge but it is more sufficient to know in one's life about Divinity. इसके बाद दिव्यता व पराशक्ति के बारे में अनुभव करने व जानने योग्य शेष दिव्य या ब्रह्मज्ञान के बारे में कुछ भी नहीं रहता। जानने के लिये आज तक जो अनुभव लिखा गया बहुत है। यह सब हम विश्वास्निय तौर पर और व्यक्तिगत अनुभव के आधार पर ही सुझाव दे रहे हैं, कि यह परम कृपा पात्र और परम स्नेही भग्तजनों के अनुकूल समय है। प्रभू  प्रेम भग्ति और नि:श्काम भाव से अनन्य भग्ति द्वारा प्रभू सेवा भाव रूपी बहुत कम मेहनत से, बहुत ज्यादा दिव्य अनुभव रूपी कमाई बटोर सकते हैं । राम नाम की लूट है लूटी जाए सो लूट, अत: लूट लो।

     धन्यवाद सहित

                                                     दास अनुदास रोहतास

Saturday, April 8, 2017

Nibiru Near Sun Divinaly

                       Nibiru Near Sun Divinaly
                    Now, we observed Nibiru, near Sun's outer Surface, in internal divine universe, during meditation divinaly, 'not with open eyes', both stabled in internal divine universe, while Nibiru stabled near Sun's outer side in space, at 8-30 am,        on 5-4-2017. We observed both in same colour as we try to show with the help of a image given below.


                            Das Anudas Rohtas

Divine Sun

                                               * Divine Sun *
                  The Divine Sun is Enlightening the Internal Divine Universe at 3-30 am, on 8-4-2017 in meditation.

                                Das Anudas Rohtas

Thursday, April 6, 2017

Hearty Parnam

                              * Hearty - Parnam *

       Jai Shree Ram,

                                    With Due Regard,                                                                True Devotee of God.

                               All of us know about God, very well, "We has always been blessed by God" but * Experience is its everyone own * and He is very kind, compassionate and appreciated, and why He will not even be, because every day 56 enjoyments made from country deshi- ghee dishes And sweets of deshi- ghee made from native ghee, pedha, juice malione rabbri, curd big, enjoyment of butter masri, palanquin made from native ghee, whole, enjoyment of kheer deposits, enjoying one beautiful sweet natural fruit, always planted by the ultimate bamps Going on Is there. Prabhu ji is being persuaded by the graceful beautiful recitation of the heart, beautiful tunes that touch the mind. Even today, Lord Bachitt, Rishi, Muni, Saints, Divine men, Yogi men and ascetic people, God as per their own understanding Day-night chanting of a variety of ways, tenacity, meditation, giyan- yoga, Karma Yoga, Hatta Yoga, Bhagti-Yoga, Laya- Yoga, Knowledge Yoga, Naam Yoga, Meditation Yoga, Sankha- Yoga and Dandvatva Pranam, Pranayam etc., and do not know any body, only to get a glimpse of the beautiful views of Shri Bhagwan Ji. Lord Lover from the Shadhana, the ultimate affectionate hindrance, by which kind of hard work, are engaged in persuading God. Various types of flowers are decorated with bouquets, temples, and dinners of the temples with different types of colorful flowers, of which different types of beautiful Fragrance come in. Like the Bride, and bridegrooms, from heart, wealth, Mind, sharda- bhav, love and service, you have come to decorated with the flowers- Malan of Bhanti-Bhanti, means different kinds of flowers from Shringhar and, by wearing affectionate tears from affection, The Lord has come to revive the lovers. Your ultimate affectionate bhakhtijan has been in mediocratical love for you since birth, he has an astounding sensation and you did not live, In fact it is a deep secrets that is difficult to understand and to explain  without Lord's grace; Divine secretaries have expressed them selves in such a beautiful way in front of their emotions, what is beautiful in these lines! " It is a matter of love and grace, it is not yours." * So God is very happy. That is why God is very graceful, very dear: kindness and appeared between us with their Divine, Mohni, Sakar, in the form of  *Manusham-Roopam*, "Sakshat" in order to persuade your ultimate affectionate true Devotee, to observe his divine Leela, all of us In the meantime, with their slow slow sweet smile, have on Shri God's leaps. * It is a matter of love, " Dear Uddhav "- Bandhgi is not in your reach (beyond of sense). * So God is very happy & kindness and appeared in the present Yuge kal-yuge between us in India some time ago in 1996 in this wonderful world, in this beautiful Shristi.

Sarveshresth Yoga :-

           Bhagti Yog + Dhyan Yog,  is Sarveshresth yog.

                                                 Das Anudas Rohtas 

Monday, April 3, 2017

सादर प्रणाम

                            * सादर प्रणाम *

जय श्री राम,
                                    परम स्नेही भग्तजनों,
                                    सादर प्रणाम।

                    भगवान के बारे में तो हम सब, बहुत अच्छी तरह जानते हैं, " वो तो नित्य प्राप्त हैं " पर * दिव्य अनुभव हर प्राणी का, सबका, अपना अपना होता है * प्रभू जी हम सब पर बहुत दयालू, कृपालू और प्रशन्न हैं, और होते भी क्यों नहीं जी, क्योकिं हर रोज देशी घी से बने ५६ भोग और देशी घी से बनी मिठाईयां, पेडे, रस मलाई रबडी, दही बडे, मक्खन मीस्री के भोग, देशी घी से बना हलुआ, पूरी, खीर के भंडारों का भोग, एक से एक सुन्दर मीठे प्राकृतिक फलों का भोग, नित्य परम भग्तों द्वारा लगाया जा रहा है। सुन्दर सुन्दर भजन कीर्तन, मन को छू लेने वाले मधुर समोहगानों द्वारा प्रभू जी को रिझाया जा रहा  है इतना ही नहीं आज भी प्रभू भग्त, ऋषी, मुनी, संत, दिव्य पुरुष, योगी पुरुष और सन्यासी जन, भगवान को अपनी अपनी सूझ अनुसार यथाशक्ति, दिन रात तरह-तरह के जप, तप, ध्यान, योग, कर्म योग, हठ योग, लय योग, ज्ञान योग, नाम योग, ध्यान योग, भग्ति योग और दण्डवत्त् प्रणाम कर, प्राणायाम आदि द्वारा, और सच पूछो तो यह किसी को भी ज्ञात नहीं कि भगवान के अति प्रिय परम स्नेही भग्त, जिज्ञाषू, लग्नेषू, श्रद्धालू व परम स्नेही भग्तजन, अपने परम प्रिय स्वामी, श्री भगवान जी के सुन्दर दर्शनों की केवल मात्र एक झलक पाने के लिये, जो शदियों से प्रभू प्रेम में व्याकुल हैं, न जाने किस किस प्रकार के कठिन परिश्रमों द्वारा, अपने स्वामी श्री भगवान जी को रिझाने में लगे हुए हैं। तरह - तरह के फूल गुलदस्तों से, मन्दिरों को, मन्दिरों के दूआरों को, तरह तरह के रंग बिरंगे फूलों से जिनमें से अलग-अलग तरह की बहुत सुन्दर महक आती है, सजाया जाता है। भगवान को भान्ति-भान्ति के फूलों से बने सुगन्दित इत्र व हार सिंगार से दुल्हन की तरह तन, मन, धन से, हृदय से, श्रधा, भग्ति, भाव, प्रेम से रिझाते आए हैं  और अपनी स्नेह भरी अश्रु धाराओं से आंशुओं की झडियां लगाते हुए, अपने  हृदय कमल में बैठे परम आत्म तत्व को अनन्य भग्ति द्वारा पवित्र करते हुए, अपने प्रभू प्रेमी से योग कर आनन्द विभोर होते आये हैं। आपके परम स्नेही भग्तजन तो जो जन्म जन्मान्तर से आप के मधुर प्रेम में मग्नमुग्द्ध व मद्धहोश पडे हैं उन्हें न अपनी होश है और न आप जी की, "वास्तव में यह एक गहरा रहस्य है जो प्रभू कृपा के बिना समझ में आना बडा कठिन है", दिव्य गोपनियों ने बडे सुन्दर ढंग से अपने भाव उजागर करते हुए मधुर शब्दों में गुणगान करते हुए ऊद्धो के सामने सम्भोदित करते हुए अपने अपने मन के भाव कुछ इस तरह से प्रकट किये , क्या सुन्दर भाव भरा है इन पंक्तियों में !, * ये तो प्रेम की बात है ऊद्धो - बन्दगी तेरे बस की नहीं है। * सो भगवान बहुत खुश हैं। इसी लिये भगवान इस पवित्र धरा पर अपने अति सुन्दर, अति प्रिय:, दिव्य, मोहनी, सरल, साकार रूप * मानूषं-रूपं * रूप में,  साक्षात, अपने परम स्नेही भग्त जनों को रिझाने हेतू, अपनी दिव्य लीला अवलोकन कराने हेतू, हम सब के बीच में, इस पवित्र धरा पर, इस सुन्दर सृष्टि में सन् 1996 में अपनी धीमी धीमी मधुर मुस्कान सहित, नि:सन्देह, अपने परम स्नेही भग्त जनों के बीच, प्रकट हो चुके हैं ।

सर्वश्रेष्ट योग :- निश्काम: भाव से, " अनन्य भग्तियोग+ध्यान योग "

             श्री प्रभू जी की चर्ण शरण में
                                                  दास अनुदास रोहतास