Wednesday, September 29, 2021

🌷Mumukshu🌷

        * Mumukshu Avatar Rohtas *

              


Mumukshu:---
Grace of God is very complesorry
Fast determination 
Self confidence
Purify of Mind
Devotional Spirit 
Holiness of Soul
Self prectic in Yoga
Self realization of Atom-Tattav
We should Sorender to God himself 
                  *************
        * Concentrate on Body *
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1 संस्कार=  अच्छा परिवार, पडोस, देश 
2 शिक्षा=     संस्कारी माता-पिता, टीचर, बुजुर्ग, बडों से
3 गुरु=        अध्यात्मिक व धार्मिक ज्ञान
4 सत्संग=    सत्संग व सनातन धर्म को अपनाना
5 दिनचर्या= आहार, व्यवहार, उठना, बैठना, खान, पान                        सोना जागना
6  योगा अक्सर्साईज, सूर्य नमस्कार, प्राणायाम, प्रत्याहार         धारणा ध्यान, समाधी कुम्भक, रेचक आदि योग आसन       क्रियाएं ।
            * नि:श्काम् क्रम योग,  निश्काम ज्ञान योग, *                    * निश्काम भग्ति योग+निश्काम ध्यान योग * 

                 " भग्ति कैसे करे " भग्ति के मार्ग "

        1  वेदो के अनुसार भग्ति - नाम योग द्वारा 
            कलयुग केवल नाम आधारा-सुमिर सुमिर नर                    उतरीं पारा !     
                                           * राम चरित मानस *
            ऊमां कहूं मै अनुभव अपना, सत्य हरि भजन                    जगत सब स्पना ।
                                                * शिव पुराण *
       11  चिन्तन, मनन, जप, तप, यज्ञ नाम सिमरन व                     अनन्य भग्ति
       111  ध्यान रहे तत्व हमे जो नित्य प्राप्त है को केवल                    अपने अनुभव मे लाने का प्रयास करना है 

              " एक साधे सब सधे   सब साधे सब जाये "                                     ------------------------
   * Concentrate on Body Sense Organs *
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7 अष्टांग-योग = ( यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार,
                         धारणा  ध्यान. समाधी )
8 सृष्टि=  जड+चेतन, पुरुष+प्रकृति
9 तत्त्व= आत्म तत्त्व+चेत्तन तत्त्व, व प्रकृति के पांच  तत्त्व-              आकाश, वायु, पृथ्वि, अग्नि, जल 
10 कर्म इन्द्रीयां= हाथ, पैर, कान, नाक, तवचा, मुंह,आंख,                सिर, शरीर ।
11 ज्ञान इन्द्रियां= आंख, कान, जीभा, त्वचा, नाक, 
12 भावनात्मक गुण=काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार,            मन, बुद्धी, ज्ञान और अहंभाव। भौतिक संसार की              उपरोक्त सभी मनोवृतियों से विमुख होकर और                  Inner Divine World में अन्तर्मुखी होते हुए,              गहरा ध्यान योग द्वारा, मन को एकाग्र करते हुए, 
      स्थिर प्रज्ञ होते हुए, अपने स्वं के अंत: कर्ण में बैठे,              व्यक्तिगत आत्म तत्त्व का बोध करने का प्रयास करना          ही, स्थिर प्रज्ञ होने का प्रयास है।

     * बहुत कठिन है डगर पनघट की, कैसे मै भर लाऊं              मधवा से मटकी *
                                           * दवापर युगे *

           कबीर मन तो   एक है     भांवे जहां लगाये, 
           भांवे गुरु की भग्ति कर,  भांवे विश्व कमाये।

             * Concentrate on Mind *
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13 सरल आसन पर बैठ
14 गहरे ध्यान योग द्वारा
15 स्वाश क्रिया रोकने का अभ्यास
16 अनहद-नाद्
17 कास्ट-सिद्धी 
18 अमृत- रसपान
19  स्थिर-प्रग्य होने का प्रयास Concentrate of                  mind, Consciousness and Stability of            Mind is very compulsory to be                        GUNATEET.

          मिटादे अपनी हस्ति को अगर कुछ मरतबा चाहे,
          कि दाना खाक में मिल कर गुलोगुलजार होता है
                ‌                                 * गालिब *
          अपने आपको मिटाना पडता है अपने अस्तित्व
          को मिटाना पडता है तब जाकर प्रभू कृपा होने पर              स्वयं के तत्व का बोध होता है।                                                                                      
20   कुंडलिनी शक्ति सक्रीय Activation:-
       अब दिव्य आदि शक्ति Kundalini Activate
       हो Long Divine Light appeared हो गयी,             इसके साथ साथ Perubh-Jiyote Activate हो           गयी, सभी दिव्य Chakra activate हो गये। यहां           तक यह सब ब्रह्मज्ञान है। आगे स्थित-प्रज्ञ होने पर,             दिव्यत्ता आने से परम ज्ञान है 
21 स्वं के आत्त्म तत्व का बोध होना
22 स्थित-प्रज्ञ होने पर दिव्यत्ता का अनुभव होना
23 तत्त्व+परम तत्तव से योग होना।
24  Grace of God होना।
25 Mumukshu :-   
               यहां तक सब परम ज्ञान है Dew to Grace of God तत्व के re-incarnation (re-birth) होने पर पात्रता प्राप्त होने के बाद अब यह दिव्य आत्म तत्व जब स्वाधिष्टान चक्र में ब्रह्मकमल की जगह पर स्थान ग्रहण कर लेता है तो मुमुक्षू के नाम से जाना जाता है। आदि Lord God भी यही है। यही मुमुक्षू है। देखिये यह दिव्य मुमुक्षू पद् जब से सृष्टि बनी तब से लेकर आज तक सभी जीवंत प्रायण हैं, और मोक्ष पद् का अधिकार भी सभी दिव्य महान आत्माओं को प्राप्त है, जो प्रभू कृपा अनुसार उन्हें जो सम्मानित स्थान सौंपा गया, वहीं विराजमान हैं, आज तक Mox किसी को भी नहीं मिला। उसका कारण स्पश्ट है " सृष्टि की नीयम बद्ध रचना है "

  All the creations are created by The Almighty God automatically, sistematically and divinely in this beautiful Shristy. 

       अगर किसी एक को मोक्ष मिलता है तो सृष्टि की कडी टूट जाएगी और प्रलय का कारण बन जाता है। हां महाप्रलय तक सबका मोक्ष पद् का अधिकार बाइज्जत्त सुरक्षित रहता है और अंत में सभी Great divine Living Souls प्रभू इच्छा व सृष्टि के नियम अनुसार सृष्टि-चक्र पूरा होने पर महाप्रलया: के समय सब शान्ति धाम को प्राप्त हो जाऐंगे।
मोक्ष आज तक श्री सूर्य देवता, lord श्री ब्रह्मा जी, श्री Lord श्री विष्णु जी, Lord श्री महेष जी, देवादिदेव श्री ईन्द्र देवता जी आदि देवताओं को व लार्ड श्री राम, लार्ड श्री कृष्ण, व Lord श्री हनुमान जी तक किसी को भी नही मिला,  हां Great Holy Spirits, जितनी भी पवित्र आत्माऐं हैं और परम तत्त्व से योग होने पर Re-Birth मिला हुआ है, सभी को सम्मान्नित मोक्ष पद्ध का अधिकार अवश्य प्राप्त हैं और आज तक सुरक्षित हैं।

26  Maha-shakti Turiya:-    

           और अब मुमुक्षू, परा शक्ति - Divine Power Turiya क्रिया की सहायत से, दिव्य बेतरणी के रास्ते, दिव्य भव-सागर को पार करता हुआ, स्वभाविकली-Naturally and Divinely, Tattav अपने मूल-परम-तत्व से योग कर लेता है। प्रभू कृपा होने से मुमुक्षू को अब, सभी दिव्य शक्तियां प्राप्त हो जाती हैं, यही लोर्ड त्रीमूरती, त्रीदेव, त्रीगुण मायाधारी ईश्वर हैं। फिर भी हमें भूलना नहीं चाहिये कि हम भगवान की कृपा के पात्र हैं, भगवान तो भगवान है, कोई भी जीव, प्राणी भगवान नहीं हो सकता।
 हां मालिक की कृपा का पात्र होने के नाते, आत्म तत्व के स्वत्न्त्र व परमहंस होने पर, भगवान की दिव्य लीलाओं को अवलोकन करने का सुअवसर अवस्य प्राप्त हो जाता है। अब प्रभू कृपा होने पर क्षण भंगुर होने से दिव्य आत्म तत्व Divine Power Matamorphsis के सक्रिय होने का सदुपयोग कर, * तत्तव दर्शी जीव * दिव्य अनुभवों से परमानन्दित हो सकते हैं। जो एक अध्यात्मिक महान दिव्य राजयोग आत्म-तत्त्व लीला है। हम सब प्राणीयों का इस अद्धभुत, सुन्दर, दिव्य, पवित्र धरा पर यह जो अनमोल जीवन पाने का शुभ अवसर प्राप्त हुआ है, हम सबका परम उद्धेश्य बनता है, अनन्य भग्ति करते हुए, स्वयं के आत्म तत्व का परम तत्व से योग कर, ईश्वर की भली भान्ति खोज कर, उसे समर्पपित होते हुए, परम पिता परमात्मा "Narayan" की खोज कर, उसके शर्णागत्त होना।

      Universal Truth  &

               Secular Spiritual knowledge






Das Anudas Moxanandhit Mumukshu Rohtas


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Monday, September 27, 2021

Shristi Chakra

     Shristi Chakra 

Shristi Chakra realized by Rohtas at 00-30 am on 9-9-21 during meditation in I D U.



Sunday, September 5, 2021

🌷 Param Tattav Gyan 🌷

       * Param Tattav Gyan by Rohtas *

Difference between Supreme Tatta & Normal Tattavs



                    Dad Anudas Rohtas