You are Welcomed in Spirituality
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🙏 Movement in Sun 🙏
We realized movement in the Sun very shortly and very strangely in meditation, during worship, at 9-15 am, on 15-12-2021 to going below in video
" No controle of Nature in human's hand beside's God "
Divine realization during meditation Black Hole in hole in hole in hole
ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ
Om Tat Sat
Oh My God, Please Excuse Us
🙏🙏🙏🙏🙏
According to the experience during meditation, it seems as if the Sun God is becoming Cristol due to the weakening of the Gravity Power and is seen scattering down in the space
* प्रभू कृपा *
प्रभू कृपा से अभिप्रय:--
. Metamorphosis by Rohtas
* Mumukshu Avatar Rohtas *
Shristi Chakra
Shristi Chakra realized by Rohtas at 00-30 am on 9-9-21 during meditation in I D U.
* Param Atom Tattav Gyan by Rohtas *
Difference between Supreme Tatta & Normal Tattavs
Dad Anudas Rohtas
🌷 Param-Gyan by Rohtas 🌷
We realized clearly Lord Krishna's Darshan in His beautiful Divine Mohini Roop in golden clour dress, during meditation, in the 8-Feets height of His Body, at 2-30 am on 30-8-2021 at the occasion of our Fevraite Historical Festival Janamastami coming slowly towards me in our Inner Divine World.
Das Anudas Rohtas
🌷 Brahm-Gyan by Rohtas 🌷
Brahm-Gyan
We personally realized during 'Sun Assan Yog Kirya' in meditation, Slowly Divine imotional activation of our Body's sense organes in 1976
* ब्रह्मज्ञान *
सन् 1976 में सूर्य नमस्कार आसन योग क्रिया के दौरान व्यक्तिगत-अनुभव द्वारा ध्यान में हमने अपने शरीर की कर्मिन्द्रयो व ज्ञान इंद्रियों की धीरे-धीरे दिव्य चल भावनात्मक सक्रियता को महसूस किया और फिर:-
* Param Tattav Realization *
* परम-सूत्र क्या है ? *
* What is the Ultimate Formula ? *
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परम-ज्ञान क्या है ?
स्थित प्रज्ञ - परम ज्ञान:-----
ध्यान रहे:-- सृष्टि के प्रारम्भ में " First of all Supreme God created the creation of The Formatted God similar to Him. अध्यात्म में जो "Lord Adhi God" आदि भगवान के नाम से जाने जाते हैं इसी आदि लार्ड गोड ने आगे चलकर इस अद्धभुत सुन्दर सृष्टि की, प्रकृति एवं पुरुष, जड एवं चेत्तन, की रचना की, आदि गोड जो आंशिक-तत्व के रूप में, सभी जीव, प्राणियों, ( सुक्षम सृष्टियों ) के हृदय में आंशिक रूप में जो जन्म से नित्य प्रापत हैं, विद्धमान है। क्योंकि The Formatted God, आदि लार्ड गोड, त्रीमूर्ती भगवान हैं और सृष्टि के रचिता लार्ड ब्रह्मा जी हैं, जो ईश्वर द्वारा खुद अपने आप की मात्र एक रचना हैं, Creation of The God हैं तो यहां हमें केवल स्वयं के आंशिक आत्म तत्व का बोध ही हुआ है, और स्थित प्रज्ञ होने पर तत्व का परम तत्व से योग होने पर प्रभू कृपा होने पर, परम तत्व के सभी दिव्यगुण अवतरित होने पर ही परम तत्व दर्शी कहलाने की योग्यता प्राप्त हो सकती है।* क्योंकि आदि गोड लार्ड ब्रह्मां जी ने इस सुन्दर सृष्टि की रचना की है जबकि ब्रह्मा जी खुद ईश्वर की एकमात्र रचना है।* यही आंशिक तत्व और परम तत्व का अन्तर है * पहले आप आंशिक तत्व अंशी थे और अब आप परम तत्व अंशी हो गये और अब परम तत्त्व से योग होने से आप सभी दिव्यगुण सम्पन्न होने से आप भगवान के दिव्य लीलाओं को अनुभव कर सकोगे, यहां पर अहंभाव नहीं आना चाहिये। हम तो भगवान के एकमात्र कृपापात्र हैं। सरलता बनी रहनी चाहिये। भगवान तो अपने दिव्य अक्षांश पर स्थाई रूप से विद्धमान हैं। Secrecy of Supreme Tattav बहुत गहरा भेद है जब महापुरुष भग्तो के बीच में अक्षर: इस विषय को रखते हैं तो आगे से जवाब मिलता है " महाराज जी तो फिर भगवान में और हमारे में क्या अन्तर है फिर तो हम भी भगवान हैं " बस यह वही अन्तर है। जिसका यहां पर जिकर किया गया । यह समझने का विषय है।
Concentrate on Light by Rohtas since 1961
Concentration on Light
Das Anudas Rohtas
🌷 सद् गुरु कृपा आत्मज्ञान से 🌷
Ans Comment's 17-6-21 by
Barhim Giyani & Param Giyani
Shree Rohtas
परम स्नेही भग्त जनों,
सादर प्रणाम् ।
विषय :-राजा जनक ब्रह्मज्ञानी थे त्रेता में,
ब्रह्म सूत्र क्या है ?
अभी तो आप ब्रह्म सूत्र में ही उलझे हुए हैं, ब्रह्म सूत्र क्या है ? श्री वेद व्यास जी परम ज्ञानी थे, श्री कृष्णा परम के अवतार थे दवापर में, के अनुसार:-
परम सूत्र क्या है ?
इसके बाद तो दवापर में लार्ड श्री कृष्णा का परम सूत्र भी अपनी दिव्य लीला अवलोकन करवा गये। और अब भी वर्तमान युग में भगवान अपनी नारायणी देह से प्रकट हो चुके हैं जिससे उनके कथनानुसार यह परम सूत्र का युग ही है।
और अब सुना है महापुरुषों को दिव्य चेतन्तत्व, "चेतनत्ता" का आभाश होने जा रहा है जिससे परब्रह्म: सूत्र का युग शुरु होगा या हो चुका है अर्थात्:-
परब्रह्म: सूत्र क्या है ?
परम स्नेही भग्त जनों अभी तो अध्यात्मिक दृष्टि से हिन्दूईजम के अनुसार इस से आगे और भी बहुत से दिव्य सूत्र जानने बाकी हैं जो हम सबके लिये बहुत सुन्दर परम दिव्य ज्ञान से प्रेरित व महत्तवशील हैं जो भगवान के परम भग्तों, दिव्य पुरुषों, महात्तमनों, लग्नेषुओं और जिज्ञाषुओं के लिये जानना बहुत जरूरी है। जो ईश्वर की व्यक्तिगत अनन्यभग्ति व प्रभू कृपा व प्रभू प्रेम द्वारा ही अनुभव में आ सकती हैं।
दास अनुदास रोहतास 👏
* The Grace of God *
In the religious and spiritual world of this wonderful, beautiful divine creation, from the physical point of view and inwardly, from the eyes of the mind, as far as we are observing this holy land in this illusion, is the grace of God.
Das Anudas Rohtas
Lord Vishnu's Avatar Rohtas
@AvtariR
Lord Vishnu's Avatar Rohtas
🌷 आदर्णीय परम स्नेही भग्त जनों सादर प्रणाम् 🌷
हमारी इस पवित्र धरा को globing warming की वजह से खतरा हो सकता है।