Sunday, March 30, 2014

* भगवान श्री त्रिलोकी के नाथ * हैं तीनों लोकों के स्वामी *

                                * श्री त्रिलोकी के नाथ *
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            अब हम ऐसे भगवान जिनका अध्यात्म जगत में विशेष स्थान हैं, भगवान श्री त्रिलोकी के नाथ जी,  जिनके पास तीनों लोकों का स्वामित्व है, और सारे जहां व तीनों लोकों और सभी सृस्टियों स्थूल व सुक्षम के आधार हैं और उन्हें प्रकाशित कर रहे हैं, एक इमेज द्वारा दर्शाने का प्रयास करते हैं, जो हमें परमपिता प्रमेश्ववर द्वारा विशेष कृपा होने पर, स्वेरे खडी अवस्था में पूजा के समय ध्यानयोग द्वारा, २९-३-२०१४,  ८-५० पर, शरीर में भृकुटि के मध्य, स्थित दिव्य ब्रह्मण्ड, " Internal Divine Universe " में अनुभव हुआ । प्रयास करने पर विश्व के सभी प्राणी, विशेषकर मानव, एक लम्बे और गहरे भग्तिमय ध्यानयोग अभ्यास,  दृड निश्चय के साथ गुणातीत हो, स्थिर-प्रज्ञ बन (परम कृपा पात्र के रूप में)  अन्तरमुखी होते हुए, अपने Internal Divine Universe में, केवल भग्वत् कृपा प्राप्त होने पर ही, Supreme Divine Soul " NIRAKARA, " व परम दिव्य लीला अवलोकन कर, अपने जीवन में परम आनन्द प्राप्त कर सकते हैं, जो अनुभव निम्न इमेज द्वारा दर्शाया गया है :-

                      " ऊमां    कहूं   मैं,  अनुभव  अपना, "
                      " सत्य हरी नाम जगत सब सपना।"
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Not:-
A Divine Supreme Power, Divine Light, seems originated like a water-ball,"Bulbula," from this Dot, " Shuksham-Bindh, " & enlightments the World and may be become incarnate in the World.
Two Planet entered very quickly in" Adhisthan " at once at 8-50,on 2-4-2014, observed in this image.

1. Dot.                              
2. Chetten Tatav. 
3. RIng "Divine-Power"
4. Tatav                         
5. Adhisthan
6. Internal Divine Universe
7. Physical Body

 !  Param Loka
!!  Purshottam Loka "Adhisthan"
!!! Purush Loka"Shiv Loka"        
!!!! Srishti  "physical-World"
                                                दास अनुदास रोहतास




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