Friday, October 26, 2018

Special Spiritual Divine Qualities By Rohtas in Present Era, Kali - Yuga

*Some Spiritual Divine Qualities By Rohtas*
" Date of Birth Rohtas 8-7-1951" at
  2-17 am

      Subtle's Avatar Rohtas

           

There are so many Divine Qualities blessed by God practically realized by Avtari Purus Rohtas during meditation, amongst them some are explained below:--

   1. Nat Khat Divine New born Baby in 1951
   2. Divine School Boy By principal in 1962
   3. Jyoti-Savroop-Anandhit Rohtas in 1966
   4. Yogi Purush in 1974
   5. Realize Move-Divine-Yoga-Kiriya 1977
   6. Realization of divine Fregrance 1978 
   7. A Divine Param Light come in 1984
   8. Tri-Murti-God realization in 1990
   9. Divine Power realization in 1991
 10. Divine Kostubh-Mani appeared 1992
 11. Divine Animal & Bird realization in1993
 12. Divine Soul Chakra realization in 1994
 13. Motiyon Wali Sarkar appeared in 1996
 14. X Planet Nibiru appeared in 1992
 15. Three in One Sun appeared in 2007
 17. Brilliant Golden Star appeared in 2012
 18. Internal Divine Universe appeared 
 19. Hearty Pranamed to Mata-Sita's Soul
 20. Hearty Pranamed to Ganga Maa in Elah
 21. Divine Journey of all Loka & Perlokas
 22. Divine Voice of Hans's & Garud's
 23. Leela realization of Kali-yuga
 24. Heaven Aanandhit Rohtas
 25. Sudershana Chakra Leela Darshana
 26. Supreme Soul, Tatav realization
 27. God & Formatted God Darshana
 28. Paarbarhma Leela Darshan, lion & Goat
 29. Lord Vishnu Darshna in Bakunth-Dham
 30. Name Yogi Rohtas
 31. Deties Leela & blessing by Goddess
 32. Rohtas divine Karan & Suksam-Sarira
 33. Rohtas Kundalini awakening Yoga 
 34. Turiya Yogi Rohtas
 35. Amrit-Ras-Pan Anandhita Rohtas
 36. Rohtas Mukta-Nanadha
 37. Rohtas Mox-Anandhita
 38. Param Tatav + Ring Anandhit
 39. Divya Inner- Parkash Anandhit
 40. Mumukshu Kirpa-Patra Rohtas
 41. Dhiyan Yogi Rohtas
 42. Divya Dhirishty Anandhit Rohtas
 43. Observation breaking Stars in I D U.
 44. Hearing Divine great An-Hadh-Nadh
 45. Observation Galaxies in meditation
 46. Observation of Divine personal ORA
 47. Observation of Divine Vertical Waves
 48. Metamorphosis by Rohtas
 49. Observation of Supreme Tatav Nirakar
 50. Observation all Divine Yoga-Chakra
 51. Observation Atom activation in Space

Special:--------  All these divine qualities are personally realised during meditation in internal divine Universe in Bhirkuti while some realized with open physical eyes, after blessing by God.

   

                    * Servshrest Yogi Rohtas *

     

                            Om Tat Sat
                                 ---------

Tuesday, October 9, 2018

* GOD *

                                     THE GOD
                                        ----------
                                Search of Truth

              

                  
Que:-  क्या भगवान हैं ?
           हैं तो भगवान कैसा है ?

Answer By Rohtas:----

               अजीब बात है जीव के इस अद्धभुत सुन्दर सृष्टि में again & again हजारों बार जन्म लेने और  हजारों, लाखों, करोडों साल इस सुन्दर सृष्टि मे जीवन पाने और परमानन्दित होने के बाद आज भी ( जीव ) प्राणी  Face-book पर यही प्रशन्न डाल रहा है कि ईश्वर कैसा है। उसका आकार क्या है आदि !

श्रीमान जी नमस्कार,

                 विषय बहुत सुन्दर आपके द्वारा डाले गये प्रशन्न भी बहुत सुन्दर हैं और इन सबसे अच्छी बात तो यह है कि करोडों साल गुजर जाने के बाद और युग-युगान्तर के बीत जाने के बाद भी इस सुन्दर अध्यात्मिक जगत में सभी जीवों व प्राणियों में ईश्वर को पाने की उसे जानने की, उस परमपिता प्रमात्मा, ईश्वर को जो नित्य-प्रापत हैं, जो समस्त सृष्टि का मालिक हैं, को अनुभव में लाने की, उनके सुदर्शन पाने की, जीवों में आज भी पूर्ण आस्था है, पूर्ण श्रधा है, पूर्ण विश्वास है,  पूर्ण जिज्ञाषू और पूर्ण लग्नेषू हैं।

     ** ईश्वर तो अन्तर्यामी हैं पर जीव भी महान है **

               सबसे पहले हम सबके पास व्यक्तिगत अनुभव होना चाहिये। अगर आपके पास व्यक्तिगत अनुभव है तो आपको दिव्य अनुभव के बारे में किसी भी किसम का कोई भी प्रशन्न किसी से जानने की आवश्यकता नहीं रह जाती। जैसा कि हम फेस बुक पर देखते आ रहे हैं एक से बढ कर एक अनचाहे प्रशन्न पूछे जाते हैं जिनका पूछने का कोई तात्प्रय: ही नहीं होता। और अगर कोई ऊत्तर दे भी दे, तो useless क्योंकि इस विषय पर व्यक्तिगत अनुभव न होने से कोई भी प्राणी विश्वास नहीं कर सकता।

* Because it is the Matter of Self-Realization *

इश्वर क्या है ?
भगवान क्या है, कैसा होता है, कैसा रंग है ?
भगवान कहां रहता है ?
भगवान मिलेगा तो कैसे मिलेगा ?
भगवान कितने प्रकार के होते हैं ?
भगवान ने इस सुसृष्टि की रचना क्यों की, किस के लिये की, अपने लिये की या हमारे लिये की और फिर रचना बनाने में भी भेद भाव कहीं लिंग-पुलिंग का अंतर और फिर अनेक प्रकार की योनियां जीवों पर थोप दी गई। भगवान ने हमारे लिये ये दुख- सुख क्यों बनाये, ये जीवन ये मृत्यू क्यों बनाये, यह अमीरी गरीबी क्यों बनाई, किसके लिये बनाये। अगर ये बनाने ही थे और हर प्राणी की मृत्यु निश्चित है तो हमें उह जीवनदान देने का क्या फायदा। भगवान सूक्षम है या बहुत बडा आकार में हैं और कहां रहते हैं श्री राम भगवान हैं या श्री कृ्ष्ण भगवान हैं! ईशा-मशीह जी भगवान हैं या श्री वाहेगुरु जी या फिर श्री मोहम्मद् जी भगवान है । ये अवतार हैं या ये भगवान हैं

              क्या भगवान प्रकट हो चुके है या अभी प्रकट होना बाकी है। हुए हैं तो कहां पर हुए । श्री कलकी भगवान प्रकट हो चुके या होना बाकी है। सृष्टि कैसे बनी इसका अंत कब और कैसे होगा ? सत्य क्या है असत्य क्या है अर्थात इस प्रकार के दिव्य व अध्यात्मिक जगत के प्रशन्नों का उत्तर हुबहु आपको  आपके अनन्य भग्ति करने पर, अन्तर्मुखी होते हुए, being scilent, स्थिरप्रज्ञ होने पर, By Deep meditaion in internal divine universe मे जाकर, उस ईश्वर की भली भांती खोज कर उसमें पूर्ण समर्पित होने पर और ईश्वर की विशेष कृपा होने पर, आपको उस मालिक का अनुभव होने पर, आपको आपके सभी प्रशन्नों का उत्तर स्वं ही मिल जाएगा। ऐसी बात नहीं जब से सृष्टि बनी इस पवित्र, अद्धभुत धरा पर ज्ञानी,  ध्यानी, ऋषि, मुनी, संत, योगी, दिव्य पुरुष, महापुरुष, अवतार तभी से होते आय हैं जो इस सुन्दर सृष्टि में हमारे मध्य आज भी हैं और जो पूर्ण सक्षम हैं, सर्व गुण सम्पन्न हैं और भविष्य में भी होते रहेंगे और अपने दिव्य अनुभवों के अनुसार अध्यात्मिक ज्ञान की छंटा Fragrance इस सुन्दर अध्यात्मिक संसार में छोडते रहते हैं जिससे यह समस्त विश्व आज भी उनके दिखाय हुए रास्ते पर चल कर ब्रह्मज्ञान और दिव्य अनुभवों से लाभान्वित हो रहा है और होता रहेगा ।

 सारांश:- " ईश्वर कृपा अनन्य भग्ति और  व्यक्तिगत अनुभव "
                         
     " मिटा दे अपनी हस्ती को   अगर कुछ मर्तबा चाहे,
       कि दाना खाक में मिल कर गुलो गुलजार होता है "


                              **************

                                           दास अनुदास रोहतास

                 


  

* ATOM * BACTERIA CELL * GERMS *

 
    * जिवाणु * Bacteria Cells * Atom *
                         ------------------------

   श्रीमान जी नमस्ते,

  No. 1                 ध्यान ४-३० am on 9-10-18 का है बहुत सुन्दर साफ ध्यान में ये जीवाणु हमने आन्तरिक दिव्य ब्रह्मांड में बिल्कुल साफ साफ अवलोकन किये हैं बहुत बारीक ध्यान मन की दिव्य ज्ञानमय आंखों से बारीक गहरा ध्यान जो पांच मिन्ट तक लगा होगा जो हमने दर्शाया इससे भी बारिक और यह सब जीवाणु खिल-बिल, खिल-बिल कर रहे हैं ( बडे आकार में देखा जाए तो श्रावण के महिने में एक जीव जिसे हरियाणवी भाषा में तीज जैसी एक गोल भूंडी कहते हैं वैसा नजर आता है रंग गहरा पीला भूरा ) एक बीज होता है," कांगणी " का उससे भी १००० गुणा बारीक लेकिन बिल्कुल साफ अनुभव है। "* यही भगवान की दिव्य लीलाएं हैं *" वैसे अति सूक्ष्म से भी सूक्षम रूप मे Miner - Atoms भी हो सकते हैं बहुत बारीक हैं और ऊपर नीचे भी हो रहे हैं पर यह देखने में Human Germs ( Bacteria ) जैसे नजर आ रहे हैं और ऐसा भी हो सकता है कि अध्यात्मिक दृष्टि से बहुत ज्यादा तादाद में Atoms आत्माएं अनुभव हो रही हैं बीच में हीरे की कणी की तरह एक दिव्य परम आत्मा  Supreme Divine Atom चमकता हुआ अनुभव हो रहा है। बिल्कुल साफ दृष्य है। सुना है आकार में Atom हमारे शरीर के एक बाल की नोक वाला सिरा जो होता है उसके 20×20 वां जो भाग होता है उसके समान होता है यह दिव्य अनुभव तो उससे भी कई गुणा बारीक और साफ सुन्दर अनुभव है। आगे प्रभू जी की कृपा है।

                 

  No. 2              *  सत्य की खोज *
                                 ----------

            इतना ही नहीं 10-10-18 को भी 1-15 am पर Only, " Supreme Divine Atom" के बहुत सुन्दर साफ दिव्य दर्शन, In Internal Divine Universe में अवलोकन करने को मिले हैं जो नीचे चित्र में दर्शा दिया गया है। बहुत सुन्दर, साफ, दुर्लभ, अद्धभुत दिव्य परम आत्मा, Supreme Soul, Supreme Atom, * सूक्ष्म * "निराकारा" के दिव्य दर्शन अवलोकन करने का शुभ अवसर प्राप्त हुआ है। हम सबको उस परम पिता प्रमात्मा को समर्पित होते हुए, * सत्य * की भली-भांती खोज कर परमानन्द को प्राप्त होना चाहिये जो एक मानव धर्म है और जो हम सब जीवों का और प्राणियों का, इस सुन्दर सृष्टि में यह अनमोल दिव्य, सुन्दर जीवन पाने का एकमात्र उद्धेश्य भी है।

 विशेष:---

            अत: अब बिल्कुल स्पष्ट है कि भगवान एक अणु के समान है जिनका आकार बहुत सूक्षम से भी सूक्षम बिन्द् के समान है जो निराकार हैं जो एक हीर की बारीक कणी के समान हैं इसमें से निकलने वाली किर्ण की चमक बहुत जबरदस्त चमकिली तेज होती है जो एक अपार दिव्य शक्ति है, पूर्ण हैं और समय  रहते युग विशेष काल में, किसी भी दिव्य साकार रूप में प्रकट होने की क्षमता रखते हैं और युग-युगान्तर के बाद अपने दिव्य अति प्रिय मोहनी साकार " नारायण " रूप में भी प्रकट हो जाते हैं, जिसे ईश्वर की कृपा होने पर ही अवलोकन किया जा सकता है। और हम प्राणियों में जो आत्म तत्व है वह तो और भी सूक्षम से भी अति सूक्षम होता है केवल मात्र परम के एक अंश के समान है, जो हमारे शरीर के बाल की नोक से भी ४०० वां गुणा बारीक आकार के समान, अति बारीक होता है, जो हवा में भी दिखाई नहीं देता है। यह एक व्यक्तिगत अनुभव का विषय है! जीव के पिछले जन्म के कर्म फल उदय होने पर तथा भगवान की विशेष कृपा होने पर ही किसी विशेष प्राणी, ईश्वर के परम भग्त, लग्नेषू, जिज्ञाषू, योगी पुरुष, दिव्य पुरुष या अवतारी पुरुष को " विशेव ज्ञानमय दिव्य दृष्टि कृपा पात्र " होने पर अन्तर्मुखी होते हुए, दिव्य ब्रह्मांड जो हमारी भृकुटि के मध्य में स्थित है,  प्रभू जी की विशेष कृपा होने पर अनुभव हो सकता है।
                                  * सूक्ष्म *


  दास अनुदास सूक्ष्म अवतार रोहतास