Monday, December 30, 2019

Effectation of Natural Virtues on Shristies "Creaters" created By The Almighty God

Ask Questions *** Get Answers *** Doubt *** Solutions ***
Face Book***30-12-2019

Question by: --- Mahi Singh

Greetings to all the scholars
Everyone has a question
Everybody knows that God is one and God resides in different names in all.
Knowing all this, why do all people argue among themselves, why do they quarrel, why are they vying to see each other down, all are humans, they are believers of God, so why are all sitting enemies of each other, why not God in everyone Seeing him behaving well with him, why why ??


Answer by Shree Rohtas Ji:-----


                       " Om Tat Sat "

Namaste Ji,

                       After getting inspiration according to the grace of the owner, we try to write the answer in brief. According to the big law - the law and the destiny of God, in this beautiful creation, all the body-like creation has been made with the combination of male and natural elements. Spiritually, the soul is addressed here with the word Purush and our divine capable body made of the bondage of natural qualities has been known as nature here. Please pay attention here.

                        Changing is the law of nature, due to the change in the properties of nature, the attitudes, Nature, Rajoguna, Sarogun and Tamoguns are influenced by the qualities of every universe here, and by the qualities of the five elements and knowledge of nature. Those who have a close relationship with our mind, the nature of the mind is very fickle, due to which all these able beings (living beings) etc. can be seen in the experience of different nature. Under the ultimate soul is Immortal is the same in all the Holy Soul's holy, which are Vikar mukt " Gunateet " (The Holy Soul which is very holy is Immortal, which, while being devoid of (multiplication), always remains the same, stable, holy in the last and middle all three stages, so all the beings are different from nature even though they are Bhagavan Prima i.e. God is the form.

       Spiritual intelligence

                                  Das Anudas Rohtas

Sunday, December 29, 2019

अध्यात्मिक दृष्टि से सृष्टि में पुरुष व प्रकृति का गहरा सम्बन्ध है

Face - Book
प्रश्न पूछें *** उत्तर पाएं *** शंका *** समाधान ***
Question by :--- Mahi Singh 

सभी विद्वानों को प्रणाम
सभी से एक प्रश्न है
सभी जानते है कि भगवान एक ही है और नाम अलग अलग ओर सभी मे भगवान वास करते है
ये सब जानते हुए भी सब लोग आपस मे बहस क्यों करते है क्यों झगड़ते है क्यों एक दूसरे को नीचा देखाने की होड़ लगी है सभी इंसान हैं भगवान को मानने वाले है तो सभी क्यों एक दूसरे के दुश्मन बने बैठे हैं क्यों नही हर किसी मे भगवान को देख कर उसके साथ अच्छा वयवहार करते ,क्यों क्यों ??

Answer by Rohtas:----
                        " Om Tat Sat "


 नमस्ते जी,
               मालिक की कृपा अनुसार प्रेरणा पाकर संक्षिप्त में  उत्तर लिखने का प्रयास करते हैं। भगवान ने बडे विधी - विधान व नियति अनुसार इस सुन्दर सृष्टि में शरीर रूपी सभी सृष्टियों की रचना पुरुष एवं प्रकृति के मेल से की है अध्यात्मिक दृष्टि से  आत्मा को यहां पुरुष शब्द से सम्भोदित किया है और हमारे दिव्य सुक्षम शरीर जो प्राकृतिक गुणों के बन्धन से बना है को यहां प्रकृति के नाम से जाना गया है कृपया यहां ध्यान देने की आवश्यकता है Changing is the law of Nature जिसकी वजह से प्रकृतिओं के गुणों मे बदलाव होने से यहां हर सृष्टियो की मनोवृतियां, स्वभाव, nature, सत्वगुण, रजोगुण, व तमो गुणो के प्रभाव की वजह से और प्रकृति के पांचों तत्वों व ज्ञानिन्द्रियों के गुणों से प्रभावित होती है जिनका हमारे मन से घनिष्ट सम्बन्ध होता है मन का स्वभाव बडा चंचल है जिनकी वजह से ये सब सूक्षम सृष्टियां (प्राणी, जीव) आदि भिन्न भिन्न स्वभाव वाली अनुभव में नजर आती है लेकिन परम आत्मतत्व सब मे एक समान है  जो Holy Soul अति पवित्र है, Immortal है, जो विकारमुक्त (गुणातीत) होने पर आदि अंत और मध्य तीनों अवस्थाओं मे सदा समान, स्थिर, पवित्र बनी रहती है अत: सभी सुक्षम सृष्टियां स्वभाव से भिन्न होने पर भी भग्वत् प्रायण हैं, भगवान स्वरूप हैं ।
           अध्यात्मिक गुह्य ज्ञान
                            दास अनुदास रोहतास