Saturday, December 30, 2023

🌲 अद् वैत्त्तम अच्यूत्त्तम अनादिम अनंत-रूपं 🌲

 "अद् वैत्त्तम अच्युत्त्तम अनादिम् अनंत-रूपं " ब्रह्मं संहिता --5.33...

       यद्धपि तात्विकता से भगवान के अनेक रूप हैं फिर भी वो एक ही परम व्यक्तित्व हैं, भगवान की नियम बद्ध रचना है जो क्रमश: दिव्यत्ता से एक सूत्र, परम सूत्र में पिरोये होने पर " एक ही परम व्यक्तित्व हैं " ध्यान रहे:-- 🌿 भगवान के कारण शरीर का कृपा पात्र, सूक्ष्म शरीर से मुमुक्षु होता है जो स्वाधिष्टान चक्र में विराजमान होता है और मुमुक्षु का कृपा पात्र  अनन्य परम भग्त का गुणातीतमय सूक्ष्म शरीर होता है । 🌿


दास अनुदास चैतन्यमय आदि ईश्वर अवतार रोहतास

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