Friday, July 17, 2015

" सौरमंडल के ग्रहों में हलचल, सूर्य देवता के गर्भ में निबरू देवता का सृजन "

    "सूर्य देवता के गर्भ में निबरू देवता का अवलोकन"
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               जैसा की हम सब जानते हैं प्रिय: भारत देश एक अध्यात्मिक, धार्मिक, सनातनी व दिव्य देश है यंहा पर आदि काल से महापुरुषों, योगी पुरुषों दिव्य पुरुषों व अवतारी पुरुषों ने इस पवित्र धरा पर जन्म लिया एतिहास साक्षी है, और लेते रहेंगे। भारत देश में सूर्य को देवता व भगवान माना जाता है, जो सत्य है और माना जाना चाहिये। प्रकृति व पुरुष, समस्त प्राणी व जीव सभी का जीवन-आधार सूर्य देवता ही हैं। सभी सनातनी व सभी धर्म प्रेमी अपनी अपनी सूझ व समझ अनुसार सूर्य देवता को पूजते आए हैं, पूज रहे हैं और पूजते रहेंगे।
               संयोगवश हम भी सूर्य देवता को नमस्कार व पूजा करतें हैं जो हम से बनपाती है। मौसम साफ न होने पर, विधिवत् ३-८-१९९२ को १२-४० सांय, हम ने सूर्य नमस्कार किया तो सूर्य देवता की असीम अद्धभुत कृपा हुई। अवलोकन करने पर हमने देखा की सूर्या देवता के अन्दर एक पीले रंग का नींबू के आकार का नींबू के रंग में जो घडी में लगे पैन्डूलम की तरह दाएं -  बाएं बाहरी किनारे के साथ-साथ अर्ध-वृत की दूरी सीमा में अन्दर की ओर चक्र लगा रहा था, यह एक सूर्य देवता के गर्भ में पल रहे नव ग्रह की रचना थी। जिसे हम साक्षात अपनी आंखों से कई मिन्ट तक देखते रहे। सब से इसका हमने जिकर भी किया । हम सब को नमर्ता से कहते थे की नई सृष्टि सृजन हो चुकी है, लेकिन आम मानव होने के नाते किसी ने महत्व नहीं दिया और वैसे भी आम मुनष्य की समझ से बाहर है, जिसका पूरा रिकार्ड हमारे पास मौजूद है। यही " NIBIRU " हो सकता है या फिर पलूटो भी हो सकता है जिसको निम्न चित्र दू्ारा दरषाया गया है। जिसके सौरमंडल में शामिल होने पर हल चल हो सकती है।
     
   
                                  दास अनुदास रोहतास

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